अजहर से पूछताछ की मांग करेगा भारतUpdated: Thu, 25 Feb 2016 10:14 PM (IST)

भारत इस बारे में पठानकोट हमले की जांच के लिए आने वाले पाकिस्तान के दल के समक्ष अपनी मांग रखेगा।

नई दिल्ली। पठानकोट एयर बेस पर आतंकी हमले के सिलसिले में पाकिस्तान में पकड़े गए जैश-ए-मोहम्मद के मुखिया मौलाना मसूद अजहर से भारतीय जांच एजेंसियां भी पूछताछ करना चाहती हैं। भारत इस बारे में पठानकोट हमले की जांच के लिए आने वाले पाकिस्तान के दल के समक्ष अपनी मांग रखेगा।

जैश मुखिया अजहर को भारत ने दिसंबर 1999 में इंडियन एयरलाइंस के अहृपत विमान के यात्रियों की रिहाई के बदले छोड़ा था। विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने गुरुवार बताया कि पाक पीएम नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज ने मसूद अजहर के बारे में जो बात कही है, उसे गंभीरता से नोट किया गया है।

अब पाकिस्तान से पठानकोट हमले की जांच के लिए जो दल आ रहा है उसके सामने हम इस मुद्दे को उठाएंगे। भारत इस बारे में पाकिस्तान से जांच दल के आगमन आदि के बारे में ठोस प्रस्ताव का इंतजार कर रहा है।

विदेश मंत्रालय के सूत्रों के मुताबिक मसूद अजहर की तलाश भारत को पठानकोट हमले के अलावा अन्य मामलों में भी है।

निश्चित तौर पर भारत की कोशिश होगी कि हमारी जांच एजेंसियों को उससे पूछताछ करने की इजाजत पाक सरकार से मिले। वैसे भारत की तरफ से पूरी तैयारी है कि पठानकोट हमले में जैश के हाथ के पक्के सबूत पाक को दिए जाएं। कुछ सबूत पहले ही दिए जा चुके हैं।

पठानकोट हमले से पहले उधमपुर हमले में जिंदा पकड़े गए फियादीन आतंकी और हाल ही में कश्मीर में पकड़े गए एक आतंकी के तार भी जैश से जुड़ा हुआ है। भारत पाक के अधिकारियों के सामने इस बारे में भी सबूत पेश करने को तैयार है।

विदेश मंत्रालय ने विदेश सचिव स्तर की वार्ता को लेकर कुछ स्पष्ट तौर पर तो नहीं कहा है लेकिन जानकारों का कहना है कि नेपाल में भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिवों की वार्ता हो सकती है। नेपाल में जल्द ही सार्क देशों की शीर्ष स्तरीय बैठक की तैयारी को लेकर एक बैठक होनी है।

माना जा रहा है कि भारत और पाकिस्तान के विदेश सचिव इस दौरान द्विपक्षीय बातचीत करेंगे। यह बातचीत जनवरी मध्य में होनी थी लेकिन पठानकोट हमले के बाद इसे रद्द कर दिया गया था। दोनों देशों के विदेश सचिव हालांकि एक दूसरे के संपर्क में हैं लेकिन द्विपक्षीय वार्ता को लेकर अभी सहमति नहीं बनी है। सनद रहे कि पहले भी दोनों देशों के राष्ट्रीय सुरक्षा सलाहकारों और विदेश सचिवों ने थाईलैंड में बैठक की थी।

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