सिविल सेवा परीक्षा फार्म में ट्रांसजेंडर का विकल्प क्यों नहीं?Updated: Mon, 15 Jun 2015 08:32 PM (IST)

दिल्ली हाई कोर्ट ने यूपीएससी, केंद्र व कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को जारी किया नोटिस।

नई दिल्ली। हाई कोर्ट ने केंद्र सरकार व संघ लोक सेवा आयोग (यूपीएससी) से सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के आवेदन फार्म में विकल्प के रूप में ट्रांसजेंडर न होने पर जवाब तलब किया है। न्यायमूर्ति मुक्ता गुप्ता व न्यायमूर्ति पीएस तेजी की खंडपीठ ने यूपीएससी व केंद्र सरकार के कार्मिक व प्रशिक्षण विभाग को नोटिस जारी कर पूछा है कि परीक्षा आवेदन फार्म में ट्रांसजेंडर वर्ग को पात्रता मानदंड में शामिल क्यों नहीं किया गया?

जबकि सुप्रीम कोर्ट ऐसे व्यक्तियों को तीसरे लिंग के रूप में पहले ही घोषणा कर चुकी है। मामले की अगली सुनवाई 17 जून को होगी। खंडपीठ ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि 15 अप्रैल, 2014 सुप्रीम कोर्ट के फैसले के बाद भी ऐसा करके आप ट्रांसजेंडरों को परीक्षा से सीधे तौर पर अनुत्तीर्ण कर रहे हैं। अदालत उस जनहित याचिका पर सुनवाई कर रही थी, जिसमें लिंग पात्रता मानदंड पर यूपीएससी द्वारा सिविल सेवा प्रारंभिक परीक्षा के लिए जारी नोटिस को खारिज करने का आग्रह किया है।

पेश मामले में, अधिवक्ता जमशेद अंसारी ने जनहित याचिका दायर की है। याचिका में गुहार लगाई गई है कि सिविल सेवा परीक्षा आवेदन फार्म में विकल्प के रूप में ट्रांसजेंडर को भी शामिल किया जाए। याचिका में बताया गया है कि यह परीक्षा आगामी 23 अगस्त को होनी है। परीक्षा के लिए आवेदन करने की आखिरी तारीख 19 जून है। आवेदन फार्म में तीसरे विकल्प के रूप में ट्रांसजेंडर को शामिल नहीं किया गया है, जो गलत है।

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