अपने परिवार को खुद खोजेगी गीताUpdated: Fri, 01 Jul 2016 10:01 PM (IST)

किस्तान से लौटने के नौ महीने बाद भी गीता के परिवार का कोई पता नहीं चल सका है।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। बांग्लादेश से छह साल वापस लौटा सोनू तो गुरुवार को अपने परिवार के पास चला गया लेकिन पाकिस्तान से लौटने के नौ महीने बाद भी गीता के परिवार का कोई पता नहीं चल सका है। सरकार की तरफ से उसके मां-बाप या घर-गांव का पता लगाने की सारी कोशिशों का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। अब एक नई कोशिश शुरू की जा रही है।

गीता खुद ट्रेन पर सवार होगी और बिहार व झारखंड के चप्पे-चप्पे का दौरा करेगी। रेल मंत्रालय व विदेश मंत्रालय की मदद से गीता इन दोनों राज्यों में अपनी याद्दाश्त के मुताबिक अपने घर-गांव को पहचानने की कोशिश करेगी। गीता ने अभी तक अपने गांव व घर की जो तस्वीर खींची है उससे उसके इन दो राज्यों के ही होने की संभावना है।

विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता विकास स्वरूप ने स्वयं गीता के परिवार की खोज के लिए नई कोशिशों के बारे में बताया। स्वरूप के मुताबिक ट्रेन से घर की तलाश करने का आइडिया गीता का ही था। उसके बाद विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने इस बारे में रेल मंत्री सुरेश प्रभु से बात की। अब उसकी यात्रा का इंतजाम किया जा रहा है। संभवतः गर्मी के मौसम के बाद उसे बिहार व झारखंड की यात्रा पर भेजा जाएगा। गीता इस दौरान रेल मंत्रालय की मेहमान होगी। उसके साथ उसके अनुवादक व कुछ अन्य सहयोगी होंगे।

गीता के परिवार को खोजने के लिए कुछ महीने पहले विदेश मंत्री स्वराज ने बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के साथ विचार-विमर्श के बाद एक अभियान शुरू किया था लेकिन उसका भी कोई सकारात्मक नतीजा नहीं निकला। बिहार सरकार ने गीता का फोटो बिहार के हर पुलिस स्टेशन को भेजा था। वहां जब गीता गायब हुई थी तब के समय के आसपास के सारी लापता लड़कियों की रिपोर्ट से उसका मिलान करवाया गया था। इसके बाद कुछ लोगों के गीता के परिवार के होने का अंदेशा भी निकला लेकिन डीएनए टेस्ट में उनके सैंपल मैच नहीं किए। उसके बाद से ही विदेश मंत्रालय इस उधेड़बुन में था कि अब आगे क्या किया जाए।

सनद रहे कि विदेश मंत्री ने स्वयं गीता से उसके परिवार के बारे में विस्तार से पूछा था। वह इस नतीजे पर पहुंची थी कि जिस तरह के परिवेश और माहौल का जिक्र गीता कर रही है वह बिहार या झारखंड के आसपास का हो सकता है। इस आधार पर ही उसे बिहार व झारखंड की यात्रा पर भेजने की शुरुआत की जा रही है।

वैसे वह इंदौर के एक संस्थान में एक सामान्य जीवन जी रही है। उसने हाल ही में संपन्न उज्जैन सिंहस्थ महाकुंभ में भी हिस्सा लिया था। वह नाटकों में हिस्सा ले रही है। वह शास्त्रीय नृत्य भरतनाट्यम भी सीख रही है।

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