'भागवत नवनीत' के लिए गीता प्रेस ने तोड़ी परंपराUpdated: Sat, 17 Oct 2015 07:08 PM (IST)

एक-एक पंक्ति को ग्रंथ के रूप में प्रकाशित करने में गीता प्रेस गोरखपुर ने अपनी परंपरा भी तोड़ दी।

मथुरा। भागवत कथा के पुराने जानकारों में से एक डोंगरे जी महाराज के श्रीमुख से निकली भागवत की एक-एक पंक्ति को ग्रंथ के रूप में प्रकाशित करने में गीता प्रेस गोरखपुर ने अपनी परंपरा भी तोड़ दी। मथुरा के भागवत विद्वान प्रेमी मथुरिया ने डोंगरे महाराज की कथा का हिंदी लिप्यांतर कर 'भागवत नवनीत' ग्रंथ की रचना की। इसका प्रकाशन न केवल गीता प्रेस ने किया, बल्कि पहली बार किसी लेखक का नाम देकर लीक से हटकर काम किया।

इसका ऑनलाइन संस्करण भी जारी किया गया है। हनुमान प्रसाद पोद्दार द्वारा स्थापित गीता प्रेस गोरखपुर के बारे में विख्यात है कि वह अपनी प्रकाशित किसी किताब या ग्रंथ में किसी लेखक के नाम का उल्लेख नहीं करती है। न ही लेखक को पारिश्रमिक दिया जाता है, लेकिन 'भागवत नवनीत' ग्रंथ के प्रकाशन में गीता प्रेस ने एक परंपरा तोड़ दी है।

संत डोंगरे जी महाराज की भागवत को संकलित और संपादित करने वाले प्रेमी मथुरिया द्वारा लिखित 'भागवत नवनीत' में उनके नाम का उल्लेख ब्रजवासी प्रेमी मथुरिया के नाम से किया गया है। अपने संपादकीय में भी संपादक राधेश्याम खेमका ने उनके नाम का उल्लेख किया है, जिसे धार्मिक साहित्य जगत में बड़ी बात माना जा रहा है।

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