गीता जयंती पर विशेषः गीता का जन्म स्थान ही उपेक्षितUpdated: Mon, 21 Dec 2015 09:35 AM (IST)

ब्रह्मासरोवर मेले को भव्य बनाने में ज्योतिसर को भूल गए, कोई बड़ा आयोजन तो दूर, आसपास सफाई भी नहीं।

बृजेश द्विवेदी, कुरुक्षेत्र। पहली बार गीता जयंती पूरे हरियाणा में मनाई जा रही है। अगले वर्ष से अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मनाने की सरकार की तैयारी है, लेकिन उस स्थान को ही भुला दिया गया है जहां योगीराज श्रीकृष्ण ने अपने सखा अर्जुन को गीता का उपदेश दिया था। आयोजन तो दूर इस जगह पर सफाई तक नहीं है।

इस वर्ष श्रीमद्भगवत गीता की 5151 वीं जयंती है। हरियाणा में वर्ष 1987 से कुरुक्षेत्र में गीता महोत्सव मनाया जा रहा है। पहली बार प्रदेशभर में इसे मनाया जा रहा है। कुरुक्षेत्र में तो आयोजनों की धूम मची हुई है। एक तरह से पूरी राज्य सरकार यहां कैंप कर रही है, लेकिन सारा आयोजन पवित्र ब्रह्मासरोवर पर तक सीमित होकर रह गया है। ब्रह्मासरोवर पर्यटकों से खचाखच भरा हुआ है।

वहीं, गीता की वास्तविक जन्म स्थली ज्योतिसर सरोवर पर सन्नाटा पसरा है। यहां सामान्य दिनों की तरह ही पर्यटक आ रहे हैं। सरोवर का पानी पूरी तरह से गंदा है। गीता जन्म स्थली को जाने वाली सड़क पर पेड़ों की छंटाई कर ऐसे ही छोड़ दिया गया है। इतना जरूर था कि ज्योतिसर स्थित राजकीय विद्यालय में गीता जयंती के नाम पर शनिवार को सांग का आयोजन किया गया था। ज्योतिसर के ही कुछ ग्रामीण यहां गीता का पाठ व हवन यज्ञ करते हैं। देश और विदेश से आने वाले लोग यहां दर्शन के लिए जरूर आते हैं, लेकिन आकर गीता जन्म स्थली की भव्यता की उनकी परिकल्पना टूट जाती है।

प्रदेश सरकार ने गीता जयंती के आयोजन के लिए हर जिले को 10-10 लाख रुपये दिए हैं। कुरुक्षेत्र जिला चाहता तो अपना जिला स्तरीय कार्यक्रम गीता जन्म स्थली पर कर सकता था। इस संबंध में जब केडीबी की मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. पूजा भारती से संपर्क किया गया तो उन्होंने फोन नहीं उठाया।

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