गीता की मां ने कहा, सालों बराबर लग रहा एक-एक पलUpdated: Wed, 21 Oct 2015 11:51 PM (IST)

गुजरे सालों की पीड़ा और बेटी के आने का संतोष गीता की मां शांति देवी के चेहरे पर साफ झलक रहा है।

नवीन गौतम, नई दिल्ली। क्या बताएं अब तो एक-एक पल सालों के बराबर लग रहा है। बस इसी इंतजार में हैं कि हमारी बिटिया जल्दी आ जाए। खैर, जब 11 साल से ज्यादा वक्त उसकी याद को सीने में दबाए गुजार दिए तो दो-चार दिन और कट जाएंगे। खुशी है बिटिया अपने देश वापस लौट रही है। गुजरे सालों की पीड़ा और बेटी के आने का संतोष गीता की मां शांति देवी के चेहरे पर साफ झलक रहा है।

गलती से पाकिस्तान चली गई गीता 26 अक्टूबर को भारत लौट रही है। गुम होने से पहले उसका नाम हीरा था, लेकिन पाकिस्तान में उसे गीता नाम मिला है। उसकी अगवानी के लिए दिल्ली पहुंचे माता-पिता मंगोलपुरी में अपने एक परिचित के यहां ठहरे हुए हैं। उनके साथ गीता का 11 साल का बेटा संतोष भी आया है। मूल रूप से बिहार का रहने वाला महतो परिवार पिछले 30 साल से लुधियाना में रह रहा है।

बातचीत के दौरान शांति देवी के चेहरे के भाव उतरते-चढ़ते हैं। कभी बीच में रुकती हैं तो कभी एक स्वर में बहुत कुछ कह जाती हैं। वह बताती हैं कि बेटी की शादी उमेश महतो से की थी। बेटी न तो बोल पाती थी और न ही सुन पाती थी। पति के साथ जालंधर के एक गांव में रहती थी। (पास बैठे संतोष की तरफ इशारा करते हुए) वहीं इस बेटे को जन्म दिया। वर्ष 2004 की बात है, जब संतोष पांच माह का था, बैशाखी का मेला लगा था जहां से वह गुम हो गई, यही हमें बताया था उसके ससुराल वालों ने। चंडीगढ़, लुधियाना, खन्ना आदि सभी जगह तलाश की, अस्पतालों में ढूंढा, इसके बापू ने ढूंढा। पागलखाने में जाकर हमारी हालत पागलों जैसी हो गई, लेकिन बिटिया नहीं मिली।

ऊपर वाले पर था भरोसा

शांति देवी ने कहा कि हमने उम्मीद ही छोड़ दी थी, लेकिन कहीं न कहीं ऊपर वाले पर भरोसा था। अब वह दिन आ रहा है, हमारी बेटी हमें मिल जाएगी। हमें तो यह भी पता चला था कि जब हमारी बेटी गुम हुई तो उसके साथ मारपीट भी की गई और उसे न जाने किस ट्रेन में बैठा दिया गया जिससे वह पाकिस्तान पहुंच गई।

सारी थकान मिट गई

बेटी भारत वापस आ जाए, इसके लिए कई महीने से भागदौड़ कर रहे गीता के पिता जनार्दन महतो के चेहरे पर थकान साफ झलकती है, लेकिन बेटी के आने की खुशी के सामने वह काफूर हो जा रही है। कुरेदने पर बोले, गीता को टीवी पर देखकर एक पड़ोसी ने बताया कि शायद यह तुम्हारी बेटी हीरा है। इसके बाद हमने भी देखा। दिल्ली में विदेश मंत्रालय में आए और पूरी दास्तां बता दी।

मां से बढ़कर कुछ नहीं

नाना-नानी संग मां गीता को लेने पहुंचा संतोष बेहद उत्साहित है। अपनी खुशी वह कुछ इस तरह बयां करता हैं- "मैंने सुना और पढ़ा है मां से बढ़कर दुनिया में कोई चीज नहीं, नाना-नानी ने बहुत लाड प्यार दिया, मामा विनोद ने कभी किसी चीज की कमी नहीं होने दी, लेकिन मां को नहीं देखा था। दुर्गा मां की कृपा से मुझे मेरी मां मिलने जा रही हैं।"

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