ईडी ने जब्त की जगन मोहन की 863 करोड़ की संपत्तिUpdated: Wed, 05 Mar 2014 09:28 PM (IST)

ईडी ने बुधवार को मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत कार्रवाई करते हुए जगन और उनकी कंपनियों की 863 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की।

नई दिल्ली। जगन मोहन रेड्डी के राजनीतिक भविष्य का फैसला तो लोकसभा और विधान चुनाव में आंध्रप्रदेश की जनता करेगी, लेकिन केंद्रीय जांच एजेंसियों की कार्रवाई से फिलहाल उन्हें राहत मिलती नहीं दिख रही है। हालत यह है कि एक तरफ चुनाव आयोग चुनाव तारीखों का एलान कर रहा था तो दूसरी ओर वित्त मंत्रालय के मातहत आनेवाला प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) जगन मोहन रेड्डी संपत्ति जब्त करने में जुटी थी।

ईडी ने बुधवार को मनी लांड्रिंग निरोधक कानून के तहत कार्रवाई करते हुए जगन मोहन रेड्डी और उनकी कंपनियों की 863 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त कर ली है। ईडी ने इसे अब तक सबसे बड़ी जब्ती होने का दावा किया है। इसके पहले ईडी ने अवैध खनन के आरोप में कर्नाटक के पूर्व मंत्री जी जर्नादन रेड्डी की 600 करोड़ रुपये की संपत्ति जब्त की थी।

जांच एजेंसी का आरोप है कि यह संपत्ति जगन मोहन रेड्डी ने अपने पिता और तत्कालीन मुख्यमंत्री वाइएसआर रेड्डी के कार्यकाल में निमागाड़ा प्रसाद की कंपनी को अनुचित लाभ देकर बनाई थी। वाइएसआर रेड्डी के फैसले से निमागाड़ा प्रसाद को 1426 करोड़ रुपये का फायदा हुआ था, बदले में उसने जगन मोहन रेड्डी की कंपनियों में 863 करोड़ रुपये का निवेश किया था।

ईडी के अनुसार 863 करोड़ रुपये की यह रकम रिश्वत के रूप में दी गई थी, जिसे जब्त कर लिया है। इसके पहले इसी मामले में सीबीआइ जगन मोहन रेड्डी के खिलाफ भ्रष्टाचार निरोधक कानून की धाराओं के तहत चार्जशीट दाखिल कर चुकी है। जगन मोहन रेड्डी लगातार ईडी और सीबीआइ की कार्रवाई को कांग्रेस की राजनीतिक साजिश बताते रहे हैं।

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