दिव्यांग मुस्लिम बेटियों ने सस्वर गीता पाठ से किया मंत्रमुग्धUpdated: Sun, 17 Sep 2017 11:05 PM (IST)

हरियाणा की दिव्यांग बेटियों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि पर गीता का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को नि:शब्द कर दिया।

वृंदावन (मथुरा)। यह वाकई लाजवाब था। वह आंखों से देख तो नहीं सकती, लेकिन श्रीकृष्ण को महसूस कर रही थीं। हरियाणा की दिव्यांग बेटियों ने भगवान श्रीकृष्ण की लीला भूमि पर गीता का सस्वर पाठ कर श्रोताओं को नि:शब्द कर दिया। संत-महात्माओं सहित जिसने भी वाचन सुना, उनकी प्रतिभा की मुक्त कंठ से प्रशंसा की।

मौका था हरियाणा रेडक्रॉस प्रशिक्षण शिविर के सांस्कृतिक आयोजन का। परिक्रमा मार्ग स्थित श्री कृष्ण कृपा धाम आश्रम में चल रहे शिविर में नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की फरीदाबाद शाखा की लगभग दो दर्जन दिव्यांग छात्र-छात्राएं भाग ले रही हैं।

रविवार सुबह इन बच्चियों ने नेशनल एसोसिएशन फॉर द ब्लाइंड की राष्ट्रीय उपाध्यक्ष एवं रेडक्रॉस की एग्जीक्यूटिव मेंबर सुषमा गुप्ता के साथ गीता पाठ और भजन गायन किया। साजिदा और शशि ने जब 'श्री राधा रानी दे दो न बांसुरी मेरी' भजन सुनाया, तो बच्चे तालियों की ताल के साथ झूमने लगे।

गीता पाठ करने वाली साजिदा, राफिया, सीमा और मुमताज ने कहा कि दिव्यांगों की दुनिया में हिंदू या मुसलमान नहीं होता। हमें सुनकर आश्चर्य होता है कि लोग धर्म, जाति और संप्रदाय के नाम पर झगड़ते हैं। दोनों ने कहा कि गीता के धार्मिक महत्व से ज्यादा श्लोकों में आबद्ध जीवन पद्धति के सूत्र महत्वपूर्ण हैं।

इन श्लोकों के ज्ञान से कोई भी व्यक्ति अपनी जिंदगी खूबसूरत बना सकता है। जिसको जो पसंद हो, वह गीता से उसी ज्ञान को चुन ले और जिदगी को सार्थक बना ले। हम सभी ब्रेल लिपि की गीता पढ़ते हैं। कुछ को तो गीता कंठस्थ है और बाकी गीता कंठस्थ करने की कोशिश कर रहे हैं।

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