डिप्रेशन को मत होने देना हावी, यूं पड़ेगा भारीUpdated: Mon, 31 Jul 2017 12:50 PM (IST)

शोधकर्ताओं ने 10 सालों में 24,000 से अधिक रोगियों को ट्रैक किया। उन्होंने कहा कि डिप्रेशन के मरीजों का समय पर इलाज होना चाहिए।

लंदन। दिल के मरीज यदि डिप्रेशन के भी शिकार हैं, तो उन्हें ज्यादा सावधान रहने की जरूरत है। एक अध्ययन में यह बात सामने आई है कि ऐसे मरीजों की जल्दी मौत होने की संभावना दोगुनी होती है। शोधकर्ताओं ने 10 सालों में 24,000 से अधिक रोगियों को ट्रैक किया और पाया कि कोरोनरी आर्टरी डिजीज होने के बाद मृत्यु के सबसे बड़ा कारण डिप्रेशन था।

शोध के प्रमुख लेखक डॉ. हेदी मे ने कहा कि इस बात से कोई फर्क नहीं पड़ता है कि यह कितना बड़ा या छोटा है। जिन मरीजों में डिप्रेशन नहीं होता है, उनकी तुलना में डिप्रेशन के शिकार मरीजों की मौत का खतरा दोगुना अधिक होता है। में ने कहा कि अन्य जोखिम कारकों जैसे उम्र, हार्ट फेल, डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, किडनी फेल्योर या हार्ट अटैक के मुकाबले अवसाद मौत होने का सबसे बड़ा कारण है।

उन्होंने बताया कि कुल 15 फीसद मरीज या 2,646 मरीज फॉलोअप के दौरान किसी न किसी दौर में डिप्रेशन से ग्रस्त पाए गए थे। इनमें से करीब 37 फीसद मरीज पहले हार्ट अटैक के बाद करीब पांच साल से डिप्रेशन में थे। जो लोग डिप्रेशन से जूझ रहे थे उनके दिमाम में सेरोटोनिन का स्तर कम हो गया था, जिसकी वजह से हार्मोन्स और इलेक्ट्रो- फंक्शनिंग में बदलाव आ गया था।

डॉक्टर मे ने जोर देकर कहा कि दिल के रोगियों की लगातार डिप्रेशन की जांच होनी चाहिए। जिन मरीजों में इसके लक्षण दिखते हैं, उनका इलाज किया जाना चाहिए। इससे न सिर्फ उनका दीर्घ-कालिक जोखिम कम होगा, बल्कि उनके जीवन की गुणवत्ता में भी सुधार होगा।

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