प्रदूषित हवा कम कर रही है जिंदगी के तीन सालUpdated: Sat, 21 Feb 2015 12:04 PM (IST)

देश में वायु की गुणवत्‍ता राष्‍ट्रीय सुरक्षा मापदंड के अनुसार हो तो 66 करोड़ लोगों की जिंदगी 3.2 साल तक बढ़ सकती है।

नई दिल्‍ली। एक नए अध्‍ययन से पता चला है कि वायु की गुणवत्‍ता राष्‍ट्रीय सुरक्षा मापदंड के अनुसार हो तो 66 करोड़ लोगों की जिंदगी 3.2 साल अधिक बढ़ सकती है। यह संख्‍या देश की करीब आधी आबादी के बराबर है। दूसरे शब्‍दों में कहा जाए तो देश में 2.1 अरब जीवन वर्ष बचाए जा सकेंगे।

शिकागो के एनर्जी पॉलिसी इंस्‍टीट्यूट के डायरेक्‍टर मिशेल ग्रीनस्‍टोन ने प्रमुख अर्थशास्त्रियों और येल व हार्वर्ड यूनिवर्सिटी के सार्वजनिक नीति विशेषज्ञों के साथ मिलकर एक अध्‍ययन किया। इसमें भारत के विभिन्‍न हिस्‍सों में प्रदूषण नियंत्रण बोर्ड और सैटेलाइट डाटा के जरिये वायु की गुणवत्‍ता के आंकड़ों का विश्‍लेषण किया गया था।

अध्‍ययन के लिए 2011 की जनगणना के आंकड़ों का प्रयोग किया गया। इसमें अनुमान लगाया गया कि 66 करोड़ लोग यानी देश की करीब 54.5 फीसद आबादी उस क्षेत्र में रहती है, जहां वायु प्रदूषण आधिक है। वहीं, करीब 26.2 करोड़ लोग यानी देश की करीब 21.7 फीसद आबादी ऐसे क्षेत्रों में रहती है जहां वायु प्रदूषण तय मानक से दोगुना है।

अध्‍ययन में बताया गया है कि 120.4 करोड़ लोग यानी करीब 99.5 फीसद लोग उस क्षेत्र में रह रहे हैं, जहां प्रदूषण का स्‍तर विश्‍व स्‍वास्‍थ्‍य संगठन के द्वारा तय किए गए 10 माइक्रोग्राम पर क्‍यूबिक मीटर की सीमा रेखा से 2.5 पीएम अधिक है। यह अध्ययन रिपोर्ट इस सप्ताह के 'इकानॉमिक ऐंड पॉलिटिकल वीकली' में प्रकाशित हुआ है।

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