जैश पर कार्रवाई भी था पाक का धोखाUpdated: Tue, 26 Jul 2016 10:08 PM (IST)

आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई करने का पाकिस्तान का दावा पूरी तरह से झूठा था।

जयप्रकाश रंजन, नई दिल्ली। पठानकोट हमले के साजिशकर्ता आतंकी संगठन जैश-ए-मोहम्मद के खिलाफ कार्रवाई करने का पाकिस्तान का दावा पूरी तरह से झूठा था। पाकिस्तानी पीएम नवाज शरीफ की तरफ से पीएम नरेंद्र मोदी को फोन करना, इस घटना के साजिशकर्ताओं के खिलाफ कार्रवाई करना, जांच के लिए भारत अपना दल भेजना यह सब सिर्फ कूटनीतिक चाल थी ताकि भारत को कुछ दिनों के लिए उलझाया जा सके। अगर ऐसा नहीं होता तो आज जैश-ए-मोहम्मद आजादी से पूरे पाकिस्तान में भारत के खिलाफ जेहाद का ऐलान नहीं कर रहा होता।

सूत्रों के मुताबिक पठानकोट हमले के बाद कुछ समय के लिए जैश पर थोड़ा नियंत्रण जरूर हुआ था लेकिन कार्रवाई नहीं हुई। अब यह संगठन भारत के खिलाफ अपनी गतिविधियों को नए सिरे से धार देने में जुटा है। भारत के खिलाफ आग उगलने वाला जैश का समाचार पत्र अल कलम फिर से कराची के स्टैंड पर बिकने लगा है। इसका ताजा अंक (22-28 जुलाई) में कश्मीर को लेकर भारत के खिलाफ लोगों को भड़काने में कोई कसर नहीं छोड़ा गया है। कश्मीरियों के खून के एक-एक कतरे का हिसाब भारत से वसूलने की बात कही गई है। यही नहीं जैश ने यह भी दावा किया है कि कश्मीर में अभी भी उसके 891 आतंकी हैं जो भारतीय सेना के साथ मुकाबला करने को तैयार हैं। और इसके लिए आम पाकिस्तानी से चंदा देने का आग्रह भी किया गया है ताकि कश्मीर में जेहाद को जारी रखा जा सके।

"दैनिक जागरण" ने देश की खुफिया एजेंसियों के हवाले से यह खबर पहले ही प्रकाशित की थी कि किस तरह से पाकिस्तान की नवाज शरीफ सरकार कश्मीर मुद्दे को जिंदा करने की कोशिश में है। इसके लिए वह जैश-ए-मोहम्मद जैसे संगठनों को फिर से दड़बे से बाहर निकाल रही है। पिछले वर्ष रमजान के पाक महीने में जिस तरह से जैश ने पाकिस्तान के कई शहरों में जेहाद के नाम पर चंदा वसूलने का काम किया था उससे भारतीय खुफिया एजेंसियों के कान खड़े हो गए थे। उसके कुछ ही महीने बाद जैश के आतंकियों ने पठानकोट के सैन्य ठिकाने पर हमला किया था। भारतीय प्रशासन अब यह मानने लगा है कि इस हमले के बाद जिस तरह से पाकिस्तान प्रशासन ने जैश पर कार्रवाई करने का कदम उठाया था उसका मकसद सिर्फ भारत को धोखा देना था। यह बात इस तथ्य से साफ होती है कि पाकिस्तान के जांच दल के पठानकोट हमले की भारत में जांच करने के तीन महीने बीत जाने के बावजूद अभी तक भारतीय दल को वहां जाने की इजाजत नहीं दी गई है।

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