भारत लौटे पीरजादों ने नहीं बताया, कहां रहे दो दिनUpdated: Mon, 20 Mar 2017 10:18 PM (IST)

गायब पीरजादे सोमवार को भारत तो लौट आए, लेकिन दो दिनों तक वे कहां रहे इस रहस्य पर अभी तक पर्दा पड़ा हुआ है।

नई दिल्ली। निजामुद्दीन औलिया दरगाह के गायब पीरजादे सोमवार को भारत तो लौट आए, लेकिन दो दिनों तक वे कहां रहे इस रहस्य पर अभी तक पर्दा पड़ा हुआ है। सूफी दरगाह के आसिफ अली निजामी और नाजिम अली निजामी ने यह तो स्वीकार किया है कि उनसे पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों ने पूछताछ की, लेकिन इस दौरान उन्हें कहां रखा गया, इसको लेकर वे कुछ भी कहने को तैयार नहीं हैं।

दोनों पीरजादे सीधे तौर पर पाकिस्तान की सुरक्षा एजेंसियों को दोष नहीं दे रहे, लेकिन पाकिस्तानी समाचार पत्रों ने उन्हें भारतीय खुफिया एजेंसी "रॉ" व पाकिस्तान के राजनीतिक दल एमक्यूएम का एजेंट करार दिया है। दूसरी तरफ, एक प्रमुख भाजपा सांसद सुब्रह्माण्यम स्वामी ने उनके पाकिस्तानी एजेंसियों के साथ संबंध होने का आरोप लगाकर स्थिति को बेहद अजीब बना दिया है।

स्वदेश लौटने के कुछ ही घंटे बाद आसिफ निजामी और नाजिम निजामी ने विदेश मंत्री सुषमा स्वराज, विदेश राज्य मंत्री एमजे अकबर और वीके सिंह से मुलाकात की। अभी तक दोनों के गायब होने पर काफी सक्रिय रहे विदेश मंत्रालय ने भी अब चुप्पी साध ली है।

विदेश मंत्रालय के सूत्र पहले इस बात पर शक जाहिर कर चुके थे कि दोनों पीरजादों के गायब होने के पीछे पाकिस्तानी खुफिया एजेंसी आइएसआइ का हाथ हो, लेकिन अब कोई सूचना नहीं दी गई है।

सनद रहे कि पाकिस्तान में इनके गायब होने पर जब विदेश मंत्री सुषमा स्वराज ने पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज शरीफ के विदेश मामलों के सलाहकार सरताज अजीज से बात की थी तो इस बातचीत के कुछ ही देर बाद दोनों के कराची में पाए जाने की सूचना आ गई थी।

बहरहाल, सोमवार को मीडिया से मुखातिब दोनों पीरजादों ने इस पूरे प्रकरण के लिए कराची से प्रकाशित होने वाले अखबार "उम्मत" को जिम्मेदार ठहराया जिसने अपने एक आलेख में इन दोनों के फोटो के साथ यह समाचार प्रकाशित किया था कि इनके पाकिस्तान आने के बारे में किसी को मालूमात नहीं है।

इसमें दाता दरबार मस्जिद के कुछ लोगों के हवाले से यह सूचना भी दी गई थी कि अजमेर शरीफ दरगाह से दो लोगों को "उर्स" के लिए बुलाया गया है, लेकिन वे नहीं आ पाए हैं। जबकि हकीकत यह है कि इस खबर के प्रकाशित से पहले ही दोनों पीरजादे दाता दरबार में चादर चढ़ा चुके थे।

समाचार में पाकिस्तान में रह रहे निजामी परिवार के एक सदस्य का भी वक्तव्य दिया गया था, जिसमें उन्होंने इन दोनों के कराची जाने से अनभिज्ञता जाहिर की थी। इस आलेख में ही इन दोनों के भारतीय खुफिया एजेंसी "रॉ" के साथ संबंध होने की बात का जिक्र किया गया था।

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