रेस्टोरेंट व होटल को सर्विस चार्ज तय करने का अधिकार नहींUpdated: Fri, 21 Apr 2017 04:52 PM (IST)

सरकार ने सर्विस चार्ज को लेकर आदेश दिया है कि सर्विस चार्ज जरूरी नहीं है। पीएमओ से भी इस बारे में मंजूरी मिल चुकी है।

नई दिल्‍ली। होटल और रेस्टोरेंट में खाने के बिल के साथ सर्विस चार्ज का भुगतान बाध्यकारी नहीं है। इसका भुगतान करना ग्राहक की मर्जी पर निर्भर है। सरकार ने होटल व रेस्टोरेंट में खाने अथवा अन्य किसी सेवा के लिए सर्विस चार्ज पर पर दिशानिर्देश जारी किये हैं।

केंद्रीय उपभोक्ता मामले व खाद्य मंत्री राम विलास पासवान ने बताया कि होटल व रेस्टोरेंट सर्विस चार्ज खुद तय नहीं कर सकते हैं। यह पूरी तरह से उपभोक्ताओं की मर्जी पर छोड़ देना चाहिए।

यानी ग्राहक को होटल की सर्विस या वेटर की सर्विस पसंद नहीं आई तो वह बिल में से सर्विस चार्ज को हटाने के लिए कह सकता है। उपभोक्ता मामले मंत्रालय की ओर से तैयार दिशानिर्देशों को मंजूरी के लिए प्रधानमंत्री कार्यालय भेजा गया था, जिसे हरी झंडी मिल गई है। अब इसे राज्यों को अमल के लिए भेजा जाएगा।

प्रावधानों के मुताबिक अगर किसी भी होटल व रेस्टोरेंट में ग्राहक के बिल में बिना उसकी मर्जी के सर्विस चार्ज जोड़ा गया तो उसे गैरकानूनी मानकर उसके खिलाफ उपभोक्ता संरक्षण अधिनियम के तहत कार्रवाई की जा सकती है।

यह ग्राहक ही तय करेगा कि वह खाने के बिल सर्विस चार्ज चुकाये या नहीं और चुकाए तो कितना? रेस्टोरेंट या होटल के पास ये तय करने का अधिकार नहीं है कि ग्राहक बिल पर कितना सर्विस चार्ज चुकाएगा? खाद्य और उपभोक्ता मंत्री रामविलास पासवान ने बताया है कि पीएमओ से एडवाइजरी पास हो जाने के बाद अब इसे राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों को भेजा जाएगा।

सर्विस चार्ज व टैक्स में फर्क

एक और तथ्य यह है कि सर्विस चार्ज रेस्टोरेंट या होटल अपनी सेवा के बदले में वसूल करते हैं, जिसमें वेटर की टिप को शामिल कर लिया जाता है। अगर भुगतान कर दिया जाता है तो फिर वेटर को अलग से टिप देने की जरूरत नही है।

इसके अतिरिक्त ग्राहकों को सर्विस टैक्स का भी भुगतान करना होता है। बाहर खाने पर सर्विस टैक्स तो देना ही होगा। होटल या रेस्टोरेंट को आपके खाने के बिल पर सर्विस टैक्स वसूलने का कानूनी अधिकार है, जिसे सरकारी खजाने में जमा कराना होता है।

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