GE से हुए करार के बाद पहला डीजल इलेक्ट्रिक इंजन पहुंचा भारतUpdated: Thu, 12 Oct 2017 09:20 PM (IST)

इस परियोजना के तहत अमेरिकी कंपनी जीई 4500 एचपी और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की आपूर्ति और देखरेख करेगी।

नई दिल्ली। अमेरिकी कंपनी जनरल इलेक्ट्रिक द्वारा तैयार पहला डीजल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव भारत पहुंच गया है। अमेरिकी कंपनी के साथ भारत ने 2.5 अरब डॉलर (162 हजार करोड़ रुपये से ज्यादा) का सौदा किया है। अमेरिकी कंपनी भारतीय रेल को 1000 इंजनों की आपूर्ति करेगी।

जीई का यह इंजन इसी सौदे के तहत पहुंचा है। भारतीय रेलवे और जीई के बीच संयुक्त उपक्रम की घोषणा नवंबर 2015 में की गई थी। इस परियोजना के तहत अमेरिकी कंपनी जीई 4500 एचपी और 6000 एचपी के आधुनिक डीजल इलेक्ट्रिक लोकोमोटिव की आपूर्ति और देखरेख करेगी।

रेल मंत्री पीयूष गोयल के सौदे में किसी तरह का बदलाव नहीं करने की घोषणा के कुछ दिनों बाद जीई ने कहा था कि बिहार के मढ़ौरा में डीजल लोकोमोटिव कारखाने पर काम सही दिशा में है। लेकिन प्रदूषण से निपटने के लिए सरकार का जोर विद्युतीकरण पर होने से मीडिया ने सौदे से बाहर आने की संभावना व्यक्त की है।

अंतरराष्ट्रीय रेल कांफ्रेंस से अलग एक बातचीत में जीई साउथ एशिया के सीईओ एवं अध्यक्ष विशाल वांछू ने गुरुवार को कहा, 'डीजल इलेक्ट्रिक उन्नत श्रेणी के 1000 लोकोमोटिव में से पहला इंजन भारत के मुंद्रा बंदरगाह पर पहुंच चुका है।

बिहार में डीजल इंजन कारखाने पर हमारा काम जारी है, क्योंकि मंत्री कह चुके हैं कि करार में कोई बदलाव नहीं किया जाएगा।' उन्होंने यह भी कहा कि जीई समय से आगे चल रहा है। वहीं जीई के साउथ एशिया सीईओ ने बताया कि सालाना औसत के आधार पर 1000 लोकोमोटिव की आपूर्ति करने की योजना है। 11 सालों में इसकी आपूर्ति की जाएगी।

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