अब गोरखनाथ मंदिर को है सीएम योगी की प्रतीक्षाUpdated: Tue, 21 Mar 2017 09:24 AM (IST)

योगी की धार्मिक एवं सियासी गतिविधियों के केंद्र इस मंदिर को उनके लौटने का बेसब्री से इंतजार है।

संजय मिश्र, गोरखपुर। गोरक्षपीठाधीश्वर आदित्यनाथ योगी के उत्तर प्रदेश का मुख्यमंत्री बनने के बाद वैसे तो समूचा पूर्वांचल ही उल्लास और जश्न में डूबा है, लेकिन गोरखनाथ मंदिर का माहौल कुछ अलग ही है। योगी की धार्मिक एवं सियासी गतिविधियों के केंद्र इस मंदिर को उनके लौटने का बेसब्री से इंतजार है।

मंदिर प्रशासन एवं श्रद्धालुओं ने अभी से उनके स्वागत में पलक-पावड़े बिछा दिए हैं। डोरियों में बंधे रंग-बिरंगे गुब्बारे, लहराते केसरिया झंडे तथा सड़कों के किनारे लगे स्वागत-अभिनंदन के होर्डिंग चप्पे-चप्पे पर उल्लास का इजहार कर रहे हैं। योगी यहां कब आएंगे यह अभी आधिकारिक रूप से घोषित होना है, लेकिन उनके शानदार स्वागत की तैयारियां मुकम्मल हो गई हैं।

आदित्यनाथ योगी 1994 में पहली बार गोरखपुर आए थे। 1998 से लगातार गोरखपुर के सांसद चुने जाते रहे योगी का दिल्ली तो हमेशा आना-जाना होता रहा है, लेकिन दूसरे प्रदेशों में भी उनके कार्यक्रम लगते रहे हैं। वे पूरी तैयारी से वहां जाते रहे हैं, लेकिन रात-बिरात भी मंदिर परिसर में ही लौटकर आ जाने की कोशिश करते रहे हैं। रात में 11 बजे के बाद सोना, भोर में 3.30 बजे तक उठकर नित्यक्रिया, योग और पूजा करने के साथ गोशाला में सेवा करना योगी की नियमित दिनचर्या रही है।

सुबह 7 बजे से रात तक वह जनता के लिए समर्पित रहे हैं। मठ स्थित अपने कार्यालय में आने वाले प्रत्येक फरियादी से मिलना और उसकी समस्या का समाधान कराना उनकी शीर्ष प्राथमिकता है। जो भी पहुंचता उसे प्रसाद के रूप में पेड़ा और मट्ठा जरूर मिलता। समर्थक हों या विरोधी, सबके दुख में सहभागी बनते। मंदिर के कर्मचारियों की दिनचर्या भी योगी के इसी रंग में रंगी हैं।

योगी कोई भी काम करने से पहले और बाद में गुरु गोरखनाथ की पूजा जरूर करते हैं। मुख्यमंत्री बनने के बाद उन्हें मंदिर में आकर पूजा करनी है। योगी के कार्यालय में मीडिया अनुभाग का काम देखने वाले विनय बताते हैं कि मंदिर परिसर तो महराज जी का घर है, लेकिन पहली बार वह मुख्यमंत्री के रूप में भी यहां आएंगे। इसलिए उनके स्वागत की विशेष तैयारियां की गई हैं।

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