दोषियों पर आजीवन प्रतिबंध के पक्ष में चुनाव आयोगUpdated: Mon, 20 Mar 2017 11:11 PM (IST)

चुनाव आयोग दोषियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के पक्ष में है।

नई दिल्ली

चुनाव आयोग दोषियों के चुनाव लड़ने पर आजीवन प्रतिबंध लगाए जाने के पक्ष में है। आयोग ने राजनीति का अपराधीकरण रोकने की मांग वाली एक जनहित याचिका में दोषी करार लोगों को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के लिए अयोग्य ठहराए जाने की मांग का समर्थन किया है।

आयोग ने जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के आपराधिक मुकदमों के शीघ्र निपटारे के लिए विशेष अदालतों के गठन की मांग का भी समर्थन किया है। चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में दाखिल अपने जवाबी हलफनामे में यह बात कही है।

भाजपा नेता और सुप्रीम कोर्ट के वकील अश्विनी कुमार उपाध्याय ने सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की है। आयोग ने अपने हलफनामे में कहा है कि वह जनहित याचिका में की गई पहली और दूसरी मांग का समर्थन करता है।

उपाध्याय की पहली मांग है कि जनप्रतिनिधियों, नौकरशाहों और न्यायपालिका से जुड़े लोगों के आपराधिक मुकदमे एक साल के भीतर निपटाने के लिए विशेष अदालतों का गठन किया जाए।

और दोषी ठहराए गए लोगों को विधायिका, कार्यपालिका और न्यायपालिका के लिए अयोग्य माना जाए। दूसरी मांग है कि चुनाव सुधार से संबंधित विधि आयोग और संविधान समीक्षा आयोग की सिफारिशों को लागू किया जाए।

तीसरी मांग है कि चुनाव लड़ने के लिए न्यूनतम शैक्षणिक योग्यता और अधिकतम आयु सीमा तय होनी चाहिए। आयोग ने तीसरी मांग के बारे में कहा है कि यह मुद्दा विधायिका के कार्यक्षेत्र में आता है और इसके लिए कानून में संशोधन की जरूरत होगी। आयोग ने यह भी कहा है कि चुनाव सुधार के बारे में उसकी कानून मंत्रालय के विधायी विभाग के सचिव के साथ कई बैठकें हुई हैं।

आयोग का कहना है कि विधि आयोग की चुनाव सुधार संबंधी 244वीं और 255वीं रिपोर्ट की सिफारिशों को लागू करने के बारे में उसने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है, जो अभी सरकार के समक्ष विचाराधीन है। केंद्र सरकार ने अभी तक याचिका का जवाब दाखिल नहीं किया है। मामले पर 28 मार्च को सुनवाई होगी।

दागी सांसदों और विधायकों के संबंध में रुख साफ करे सरकार

इलाहाबाद हाई कोर्ट ने सोमवार को प्रदेश सरकार से पूछा कि वर्तमान और पूर्व सांसदों तथा विधायकों के खिलाफ लंबित आपराधिक मुकदमे शीघ्र निपटाने के लिए उसकी क्या कार्ययोजना है?

कोर्ट ने कहा कि सरकार इस पर दो सप्ताह में विचार कर अदालत को अपनी मंशा से अवगत कराए। एक जनहित याचिका पर सुनवाई करते हुए मुख्य न्यायाधीश डीबी भोंसले और न्यायमूर्ति यशवंत वर्मा की खंडपीठ ने यह आदेश दिया। याचिका आशुतोष गुप्ता ने दायर किया है।

इसमें पूर्व व वर्तमान सांसदों और विधायकों के खिलाफ आपराधिक केसों से संबंधित सुप्रीम कोर्ट के फैसले का अनुपालन करने की मांग की गई है।

अटपटी-चटपटी

  1. समुद्र किनारे मिली अजीब मछली को देख डर गए लोग, देखने जुटी भीड़

  2. फेसबुक चलाने से मना किया तो घर छोड़कर चली गईं बेटियां

  3. कद केवल 2 फीट लेकिन अरमान आसमां से भी ऊंचे

  4. थल सेना भर्ती के लिए बॉडी बिल्डिंग पड़ सकती है महंगी

  5. बीस साल से साथ रह रहे नाग-नागिन ने एक साथ प्राण त्यागे

  6. बेटे की मौत के बाद सास ने बेटी की तरह बहू को किया विदा

  7. भाभी को पत्नी के रूप में स्वीकार करने से मना किया तो कटवा दिए नाक, कान

  8. लड़की को भारी पड़ी सेल्फी, पुलिस ने ली घर की तलाशी और किया गिरफ्तार

  9. 12 साल का 'बच्चा' चार साल बड़ी लड़की को गर्भवती कर पिता बना

  10. अंडे में निकला हीरा, शादी करने जा रही महिला ने माना शुभ

  11. बच्चे को कलेजे से लगाकर ये चमत्कार कर सकती है मां

  12. विदेशी नस्ल का डॉग OLX पर मंगाया, छीनकर भाग गया

  13. 18 साल बाद मिला खून का रिश्ता, फिर हुआ कुछ ऐसा

  14. लकड़ी का ढेर नहीं ये बंदूकें हैं, चुनाव के दौरान हुई हैं जमा

  15. OMG! अपनी सुंदर बीवियों को कुरूप बना देते हैं यहां के लोग

  16. फोटो शूट के दौरान ट्रैक में फंसी मॉडल, चली गई जान

  17. गेम खेलते हुए गुस्से में कम्प्यूटर स्क्रीन पर दे मारा सिर, फिर...

  18. जिराफ जैसा बनने के लिए गर्दन में डाले छल्ले, लेकिन फिर हुआ ऐसा

  19. चार साल के बच्चे ने आईफोन की मदद से बचा ली मां की जान

  20. रेप के दौरान मदद के लिए नहीं चीखी पीड़िता, इसलिए आरोपी बरी

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.