कचरा डंप करने और विज्ञापन चिपकाने की दीवार बन गए हैं ई-टॉयलेट्सUpdated: Fri, 19 May 2017 03:34 PM (IST)

कई पंचायतों ने इन टॉयलेट्स को स्थापित करने के लिए 7 लाख रुपए तक खर्च किए हैं।

कोझिकोड। जिले में साफ शौचालयों की कमी को देखते हुए यहां लगाए गए ई-टॉयलेट्स से काफी उम्मीदें थी कि स्वच्छ भारत अभियान में यह अहम भूमिका निभाएंगे। मगर, अब दिख रहा है ये महज डंपिंग प्वाइंट्स बनकर रह गए हैं। इसके अलावा विज्ञापनों के प्रचार के लिए इनकी दीवारों पर पर्चे चिपकाए जा रहे हैं।

शहर में कुछ कॉस्मेटिक बदलावों के बाद ई-टॉयलेट्स को पुन: स्थापित किया गया था। मगर, अभी तक यह सुविधा लोकप्रिय नहीं हुई है। सबसे पहले ईरम साइंटिफिक सॉल्यूशन्स ने साल 2010 में इन्हें लॉन्च किया था। इनमें से कई ई-टॉयलेट्स को थर्मासरी, कुन्नामंगलम और बलुसेरी के बसों स्टॉप्स के पास लगाया गया था।

मगर, अब ये महज विज्ञापन चिपकाने वाली दीवारें बनकर रह गए हैं। स्थानीय लोगों ने बताया कि हम इन्हें कुछ दिनों तक ही इस्तेमाल कर पाते थे और इसके बाद वे शौच के लिए जाने लायक नहीं रहते थे। अधिकारी भी इनमें लगे इलेक्ट्रॉनिक उपकरणों के खराब हो जाने के बाद उन्हें बदलने या सुधारने पर ध्यान नहीं देते थे।

कई पंचायतों ने इन टॉयलेट्स को स्थापित करने के लिए 7 लाख रुपए तक खर्च किए हैं। मगर, अब इनकी देख-रेख करने में स्थानीय निकायों को 70 हजार रुपए तक खर्च करने पड़ रहे हैं।

थर्मासरी के ग्राम पंचायत अध्यक्ष के. सरस्वती ने कहा किहम इन शौचालयों की मरम्मत करते हैं, लेकिन लोग इस टॉयलेट के बारे में नहीं जानते हैं और वे इसे फिर से खराब कर देते हैं। ई-टॉयलेट और ग्रामीण क्षेत्रों में इसका रखरखाव केवल तभी सफल होगा, जब लोगों को इसके बारे में जागरुक किया जाएगा।

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