इस काॅलेज के प्रिंसिपल ने 16 साल में नहीं ली एक भी छुट्टीUpdated: Mon, 17 Jul 2017 05:17 PM (IST)

वे सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में होम्योपैथी में अंडर-ग्रेजुएशन के लिए प्रशिक्षित छात्रों के पहले बैच में से एक हैं।

पुणे। डाॅ. डी.वाय. पाटिल होम्योपैथिक काॅलेज के प्रिंसिपल धर्मेन्द्र शर्मा का हमेशा मजाक उड़ता था कि वे तो काॅलेज से छुट्टी ही नहीं लेते थे। अपनी प्रोफेशनल लाइफ के 16 सालों में उनकी एक भी लीव नहीं है।

जहां उनके कुछ दोस्त और सहकर्मी उन्हें ताने मारते थे कि उसकी इस उपलब्धि के लिए उन्हें क्या हासिल हो जाएगा। वहीं अन्य ने कहा कि वह अपनी जिंदगी व्यर्थ कर रहा है।

लेकिन शर्मा के लिए, यह उनके जीने का एक तरीका है। वे कहते हैं, 'हर 12वीं पास स्टूडेंट की तरह उनका भी एमबीबीएस डिग्री करने का उद्देश्य था। लेकिन एक बार जब होम्योपैथी में आया को मैंने सोचा कि जो भी करूं, उसमें अपना सर्वश्रेष्ठ दूं।'

वे सावित्रीबाई फुले पुणे यूनिवर्सिटी में होम्योपैथी में अंडर-ग्रेजुएशन के लिए प्रशिक्षित छात्रों के पहले बैच में से एक हैं।

उन्होने कहा, 'अपनी प्रोफेशनल लाइफ के 16 से ज्यादा सालों में मैंने एक भी सिक लीव नहीं ली। जहां तक सोशल कमिटमेंट्स की बात है, मैं या तो काम के बाद अटैंड करता था या फिर संडे जैसे पब्लिक हाॅलीडे पर करता था। हालांकि इसमें ऐसा कुछ नहीं कि यह मैंने प्लान किया था। मैंने कभी सोचा ही नहीं कि यह भी एक चर्चा का विषय बनेगा।'

काॅलेज से शाम 5 बजे फ्री होने के बाद, वे प्राइवेट क्लिनिक पर शाम 6 से रात 9 बजे तक बैठते थे। वे कहते हैं 'मेरी पत्नी समझती है कि कुछ भी हो जाए मुझे काम करना ही है। वैसे भी रविवार या अन्य सार्वजनिक अवकाश को पर्याप्त समय मिलता है कि मैंने अन्य गतिविधियां कर सकूं।'

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