लाॅ के क्षेत्र में बनाना चाहते हैं करियर तो इन अवसरों पर भी डालें नजरUpdated: Fri, 19 May 2017 12:00 PM (IST)

लॉ के क्षेत्र में करियर के लिहाज से आज बहुत उजली संभावनाएं हैं।

लॉ के क्षेत्र में करियर के लिहाज से आज बहुत उजली संभावनाएं हैं। अब न्यायिक प्रक्रिया से जुड़ना सामाजिक ही नहीं, पैसे और रुतबे के नजरिए से भी महत्वपूर्ण हो गया है। ग्लोबलाइजेशन और उसके बाद समाज में आए सामाजिक-आर्थिक परिवर्तनों के बाद तो नए कानूनों के बनने में इतनी तेजी आई है कि लॉ से जुड़े अच्छे विशेषज्ञों की कमी-सी हो गई है। नए रोजगार सर्वेक्षण इंगित कर रहे हैं कि भारतीय लॉ ग्रेजुएट्स की मांग देश में ही नहीं, दुनिया के विकसित और विकासशील देशों में भी है।

कोर्स व प्रवेश परीक्षा

लॉ के क्षेत्र में किसी भी करियर के लिए एलएलबी की डिग्री अनिवार्य है। एक दशक पहले तक लॉ की शिक्षा सामान्य रूप से तीन वर्ष के एलएलबी कोर्स के रूप में होती थी। पहले स्नातक डिग्री के उपरांत ही लॉ की पढ़ाई की जा सकती थी। लॉ में स्नातकोत्तर (एलएलएम) की अवधि दो वर्ष की है। इसमें दाखिला लेने की न्यूनतम योग्यता एलएलबी है। पिछले कुछ समय से पांच वर्षीय नया लॉ पाठ्यक्रम उभरकर आया है। यह कोर्स विशेष रूप से बारहवीं पूरी कर चुके विद्यार्थियों के लिए है। वर्तमान में सामान्य विश्वविद्यालयों के साथ-साथ विशेषज्ञता वाले लॉ विश्वविद्यालय भी इस पांच वर्षीय प्रणाली के अंतर्गत लॉ विषय की शिक्षा प्रदान कर रहे हैं।

सभी लॉ विश्वविद्यालय अपने पांच वर्षीय डिग्री पाठ्यक्रम में लिखित प्रवेश परीक्षा के आधार पर प्रवेश देते हैं। इस परीक्षा में शामिल होने के लिए शैक्षणिक योग्यता है कम से कम पचास प्रतिशत अंकों के साथ बारहवीं पास होना। लॉ प्रवेश परीक्षा में अंगरेजी भाषा में दक्षता के साथ-साथ सामान्य ज्ञान और राष्ट्रीय व अंतरराष्ट्रीय समसामयिक घटनाओं की जानकारी, न्यूमेरिकल एबिलिटी, लॉजिकल रीजनिंग और लीगल एप्टिट्यूड (कानूनी दक्षता) का आकलन किया जाता है।

विभिन्न लॉ विश्वविद्यालयों द्वारा ली जाने वाली परीक्षा के प्रश्नों के रुझान में थोड़ा-बहुत अंतर हो सकता है लेकिन अधिकतर मामलों में वस्तुनिष्ठ और संक्षिप्त उत्तर वाले प्रश्न पूछे जाते हैं। विवरणात्मक किस्म के प्रश्नों में भी संक्षेप में उत्तर लिखने होते हैं। इसके अतिरिक्त निबंध या किसी समसामयिक विषय पर संक्षिप्त टिप्पणी जैसे प्रश्न पूछे जा सकते हैं। प्रत्येक विश्वविद्यालय अपनी प्रवेश परीक्षा का तरीका बदलता रहता है ताकि परीक्षार्थी परीक्षा के बंधे-बंधाए ढर्रे के अनुसार तैयारी न कर सकें। इस प्रकार परीक्षा काफी प्रतिस्पर्धात्मक हो जाती है।

विभिन्न शाखाएं

आज व्यक्तिगत जीवन में ही नहीं, कंपनी और संगठन के स्तर पर भी कानूनी सलाहकारों की जरूरत बढ़ी है। कानून के विभिन्न क्षेत्रों जैसे सिविल लॉ, कॉर्पोरेशन लॉ, क्रिमिनल लॉ, इंटरनेशनल लॉ, पेटेंट लॉ, टैक्स लॉ, लेबर लॉ, एडमिनिस्ट्रेटिव लॉ, कॉन्स्टीट्यूशनल लॉ आदि में विशेषज्ञता हासिल कर रोजगार पाया जा सकता है। एलएलबी की डिग्री के साथ कई शिक्षण संस्थान लॉ के कई सहायक कोर्स भी चलाते हैं। ये डिप्लोमा कोर्स के तौर पर संचालित किए जाते हैं। इनके तहत इंटरनेशनल लॉ, सायबर लॉ, पेटेंट एंड कॉपीराइट लॉ, लेबर लॉ, टैक्स लॉ आदि के डिप्लोमा कोर्स की विशेष मांग है।

सिविल जज परीक्षा

लॉ को करियर के रूप में चुनने वाले अधिकांश विद्यार्थियों का सपना होता है न्यायिक सेवा परीक्षा में चयनित होकर सिविल जज का पद प्राप्त करना। यह काफी प्रतिष्ठापूर्ण पद है। इसमें धनोपार्जन के साथ ही सम्मान, प्रतिष्ठा व उन्नाति के काफी उजले अवसर होते हैं। देश के सभी राज्यों में सिविल जज परीक्षा आयोजित की जाती है। इसके अलावा वकीलों को संघ लोक सेवा आयोग द्वारा, उनके अनुभव के आधार पर केंद्रीय सेवाओं में भी नियुक्त किया जाता है। केंद्रीय स्तर पर लॉ ऑफिसर, लीगल एडवाइजर, डिप्टी लीगल एडवाइजर आदि के पद हैं। राज्यों में राज्य पुलिस, राजस्व एवं न्यायिक विभागों में वकीलों की नियुक्ति की जाती है। विभिन्ना स्तर के अधीनस्थ न्यायालयों में न्यायिक दंडाधिकारी, जिला एवं सत्र न्यायाधीश, सब मजिस्ट्रेट, लोक अभियोजक, एडवोकेट जनरल, नोटरी एवं शपथ पत्र आयुक्त के पद होते हैं। इनके अतिरिक्त वकील फर्मों, संस्थानों और परिवार के लिए कानूनी सलाहकार के रूप में भी कार्य कर सकते हैं।

बेहतरीन आय

कई प्राइवेट प्रैक्टिस करने वाले वकील प्रति माह लाखों में कमाते हैं। कॉर्पोरेट घरानों और कंपनियों से जुड़े वकीलों का भी वेतन बहुत आकर्षक होता है। सरकारी स्तर पर जजों तथा अन्य लॉ सेवकों का वेतन, वेतन आयोग द्वारा निर्धारित हैं। इसी तरह सॉलीसिटर, पब्लिक डिफेंडर, अटार्नी जनरल, एडवोकेट जनरल और डिस्ट्रिक्ट अटॉर्नी जैसे पद भी पाए जा सकते हैं। कई जगह कंपनी सेक्रेटरी के रूप में और लॉ रिपोर्ट लिखने हेतु राइटर की भूमिका में भी रोजगार पाया जा सकता है। शिक्षण और रक्षा सेवा में भी जाने के विकल्प इस पेशे में हैं।

प्रमुख संस्थान

- नेशनल लॉ इंस्टीट्यूट यूनिवर्सिटी, भोपाल

- देवी अहिल्या विश्वविद्यालय, इंदौर

- सिम्बायोसिस लॉ स्कूल, पुणे

- पंडित रविशंकर शुक्ल विश्वविद्यालय, रायपुर

- जवाहरलाल नेहरू यूनिवर्सिटी, नई दिल्ली

- डॉ जयंतीलाल भंडारी

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