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World Heritage Day: टेकरी की खुदाई से सामने आएगा सबसे पुराना स्तूपUpdated: Mon, 17 Apr 2017 10:39 PM (IST)

वैश्य टेकरी के अंदर भारत का महत्वपूर्ण इतिहास छिपा हुआ है।

उज्जैन। शहर में यूं तो कई पुरातत्व महत्व के मंदिर व ऐतिहासिक स्थल हैं, लेकिन वैश्य टेकरी के अंदर भारत का महत्वपूर्ण इतिहास छिपा हुआ है। पुरातत्वविदों का दावा है कि इसमें सांची जैसा ही स्तूप है, जो सबसे बड़ा और पुराना है। खुदाई होने के बाद विशाल स्तूप दिखाई देगा।

शहर से करीब 5 किमी दूर उज्जैन-तराना रोड पर करीब 100 फीट ऊंची और 350 फीट व्यास की विशाल टेकरी है। अभी यह सामान्य टेकरी दिखाई देती है, लेकिन इसके अंदर विश्व धरोहर का खजाना है। पुरातत्वविदों का कहना है इस टेकरी में करीब ढाई हजार साल पुराना स्तूप है, जो सांची जैसा ही है।

सम्राट अशोक के समय देश में जिन स्तूपों का निर्माण कराया गया था, उनमें वैश्य टेकरी का यह स्तूप भी शामिल है। बौद्धों के चार तीर्थस्थलों में यह चौथा और महत्वपूर्ण है। टेकरी की खुदाई के बाद चारों ओर परिक्रमा स्थल बनाने की योजना है।

आजादी के पहले भी हुई थी खुदाई

पुरातत्व संग्रहालय व उत्खनन विभाग विक्रम विश्वविद्यालय के प्रभारी डॉ. रमण सोलंकी बताते हैं आजादी के पहले 1937-38 में ग्वालियर स्टेट के पुराविद् गर्दे द्वारा इसकी खुदाई कराई गई थी, जिसमें मौर्यकाल के अवशेष मिले थे। दूषित गैस निकलने के कारण यह खुदाई बंद करना पड़ी थी।

सम्राट अशोक की पत्नी ने कराया था जीर्णोद्धार

- वैश्य टेकरी उज्जैन तहसील के ग्राम उंडासा में उज्जैन-तराना रोड पर है।

- मान्यता है कि भगवान बुद्ध के वस्त्र और आसंदी इसमें हैं।

- सम्राट अशोक की पत्नी देवी वैश्य ने इसका जीर्णोद्धार कराया था।

- चीन के हेनसांग ने उज्जैन आकर इसके दर्शन किए थे।

सांची से भी पुराना स्तूप है

वैश्य टेकरी के अंदर सांची से भी पुराना स्तूप है। यह बौद्धों के चार तीर्थस्थलों में से एक है। खुदाई होने के बाद इसे विश्व धरोहर में शामिल करने की उम्मीद है। भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण विभाग द्वारा इसका सर्वे किया जा चुका है तथा प्रशासन से जमीन मांगी गई है। जमीन का हस्तांतरण होना बाकी है। -डॉ. आरके अहिरवार, विभागाध्यक्ष व इतिहासकार विक्रम विश्वविद्यालय, उज्जैन

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