महाकाल की कार्तिक-अगहन मास की शाही सवारी में उमड़े भक्तUpdated: Mon, 13 Nov 2017 09:18 PM (IST)

कार्तिक अगहन मास में सोमवार को राजाधिराज महाकाल की शाही सवारी निकली।

उज्जैन। कार्तिक अगहन मास में सोमवार को राजाधिराज महाकाल की शाही सवारी निकली। 7 किलो मीटर लंबे सवारी मार्ग पर तीन घंटे भक्ति का उल्लास छाया रहा। महाकाल के स्वागत में भक्तों ने फूलों की रंगोली सजाई। भजन मंडली, झांझ-डमरू दल ने मधुर स्वरलहरियों से भक्तों का मन मोह लिया। भगवान के चंद्रमौलेश्वर रूप के दर्शन के लिए आस्था का सैलाब उमड़ा।

दोपहर 3.30 बजे मंदिर के सभा मंडप में एडीजी वी मध्ाुकुमार, मंदिर प्रशासक प्रदीप सोनी ने अवंतिकानाथ की पूजा अर्चना कर पालकी को नगर भ्रमण के लिए रवाना किया। मंदिर के मुख्य द्वार पर सशस्त्र बल के जवानों ने राजाध्ािराज को सलामी दी। इसके बाद पालकी मोक्षदायिनी शिप्रा के रामघाट की ओर रवाना हुई। परंपरा अनुसार शाही सवारी में सबसे आगे चांदी का ध्वज निकला। पीछे भजन मंडली, झांझ डमरू दल तथा प्रबुद्धजन चल रहे थे।

इन रास्तों पर उमड़े श्रद्धालु

महाकाल घाटी, गुदरी, बक्षी बाजार, कहारवाड़ी, रामानुजकोट होते हुए पालकी रामघाट पहुंची। पुजारी प्रदीप गुरु, पं.संजय पुजारी, आशीष पुजारी ने भगवान की पूजा अर्चना की। पूजन पश्चात सवारी गणगौर दरवाजा, कार्तिक चौक, ढाबारोड, टंकी चौराहा, मिर्जा नईम बेग मार्ग, छोटा तेलीवाड़ा, कंठाल, सतीगेट, गोपाल मंदिर, पटनी बाजार होते हुए शाम 7 बजे मंदिर पहुंची।

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