ज्योतिर्लिंग क्षरण की जांच : जिस जल से अभिषेक उसके नमूने लिएUpdated: Tue, 12 Sep 2017 03:47 PM (IST)

तिर्लिंग का क्षरण हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति सोमवार को दूसरी बार मंदिर पहुंची।

उज्जैन, नईदुनिया प्रतिनिधि। महाकालेश्वर ज्योतिर्लिंग का क्षरण हो रहा है या नहीं, इसकी जांच के लिए सुप्रीम कोर्ट के निर्देश पर गठित समिति सोमवार को दूसरी बार मंदिर पहुंची। टीम ने जिस जल से भगवान का अभिषेक होता है, उसके नमूने लिए।

सुप्रीम कोर्ट में ज्योतिर्लिंग क्षरण सहित कई बिंदुओं को लेकर याचिका विचाराधीन है। कोर्ट ने जियोलॉजिकल सर्वे ऑफ इंडिया के एक्सपर्ट की कमेटी गठित कर क्षरण को लेकर जांच के निर्देश दिए हैं। पूर्व में टीम ज्योतिर्लिंग का माप लेने के साथ ही शिवलिंग पर जमा पंचामृत की परत के नमूने ले गई थी। सोमवार को जल विशेषज्ञों का दल आया। सबसे पहले टीम गर्भगृह में पहुंची।

यहां भगवान महाकाल पर अर्पित हुए जल का नमूना लिया। इसके अलावा मंदिर परिसर स्थित कोटितीर्थ कुंड के साथ ही 100 मीटर की दूरी पर स्थित रुद्रसागर और शिप्रा नदी का जल भी जांच के लिए लिया गया। सदस्यों ने परिसर स्थित जूना महाकाल, अनादिकल्पेश्वर महादेव सहित अन्य मंदिर में भी जांच की।

नई बाल्टी मंगवाई, हर चीज को बारीकी से परखा

दल ने जल भरने के लिए अफसरों से नई बाल्टी मंगवाई। बाल्टी में जल लेने के बाद इन्हें साथ लाई गई विशेष बोतलों में भरा। परीक्षण तक जल की गुणवत्ता यथावत रहे, इसके लिए उसमें कुछ रसायन भी मिलाए गए।

मंदिर के अफसरों से बात नहीं, सीधे देंगे रिपोर्ट

दल के सदस्य मंदिर के अधिकारियों को भी कोई जानकारी नहीं दे रहे हैं। जांच के बाद रिपोर्ट बनाकर विभाग के मुख्यालय को सीधे भेजी जाएगी।

इन तीन सवालों के जवाब खोज रही टीम, कहीं यहां से तो नहीं आ रहा पानी

महाकाल के अभिषेक के लिए कोटितीर्थ कुंड के जल का उपयोग होता है। मंदिर से जुड़े जानकार बताते हैं कि कोटितीर्थ में मंदिर के पीछे स्थित रुद्रसागर का जल रिसकर आता है। बताया जाता है रुद्रसागर में शिप्रा का जल मिलता है। शिप्रा को खान नदी का गंदा पानी प्रदूषित कर रहा है। इसलिए टीम इससे जुड़े तीन सवालों के जवाब खोज रही है-

-शिप्रा का जल खान नदी के पानी से दूषित हो रहा है या नहीं।

-क्या शिप्रा का पानी रुद्रसागर में मिल रहा है।

-रुद्रसागर से रिसकर पानी कुंड में आ रहा है क्या।

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