महाकाल मंदिर के बजट में फिजूलखर्ची की जांचUpdated: Fri, 11 Aug 2017 10:20 PM (IST)

विभाग की एक टीम ने बजट की जानकारी लेकर परीक्षण शुरू कर दिया है। संभागायुक्त के अनुमोदन के बाद ही बजट लागू हो सकेगा।

उज्जैन। महाकालेश्वर मंदिर का बजट इस बार संभागायुक्त एमबी ओझा की कसौटी पर खरा उतर नहीं पा रहा। संभागायुक्त ने इसका अनुमोदन करने की जगह मंदिर प्रशासन को सुधार के लिए भेजा था।

यह वापस संभागायुक्त के पास पहुंच गया है, लेकिन मंदिर में हो रही फिजूलखर्ची के संदेह पर इसकी कोष व लेखा विभाग के एक्सपर्ट से जांच कराई जा रही है। बजट के कुछ मदों में अप्रत्याशित बढ़ोतरी के कारण यह स्थिति खड़ी हुई है।

महाकाल मंदिर के बजट का हर साल संभागायुक्त द्वारा अनुमोदन किया जाता है। पहले भी इसमें फिजूलखर्ची पर सवाल उठ चुके हैं।

इस बार दोबारा सुधार करने के बाद भी संभागायुक्त संतुष्ट नहीं हो सके हैं, बल्कि उन्होंने बजट को परीक्षण के लिए संयुक्त संचालक कोष व लेखा विभाग के पास भेज दिया है।

विभाग की एक टीम ने बजट की जानकारी लेकर परीक्षण शुरू कर दिया है। संभागायुक्त के अनुमोदन के बाद ही बजट लागू हो सकेगा। हालांकि मंदिर का बजट 5 माह पूर्व ही पारित हो चुका है। मार्च में इसे पारित किया गया था।

इन दो मुद्दों से रुका बजट

1- साफ-सफाई: साफ सफाई के लिए मंदिर प्रशासन ने नए बजट में काफी अध्ािक खर्च का प्रस्ताव दिया है। जबकि साफ-सफाई के लिए अलग से ठेका भी दिया गया है। मंदिर प्रशासन से यह पूछा जा रहा है कि इस कार्य के लिए 3.60 करोड़ रुपए का बजट क्यों रखा गया है।

2- स्थापना: इस मद पर भी संभागायुक्त सहमत नहीं है। इसके लिए 7.10 करोड़ का बजट रखा गया है। मंदिर में करीब 300 कर्मचारी हैं। इस कारण खर्च भी बढ़ गया है। इसको देखते हुए संभागायुक्त ने सवाल उठाया है कि आखिर इतनी बड़ी संख्या में कर्मचारी क्यों रखे गए हैं।

मंदिर की व्यवस्था पर ये असर

- बजट का अनुमोदन होने के बाद ही मंदिर प्रशासन बजट के अनुसार काम कर सकेगा। सामान्य कार्य इससे प्रभावित नहीं होंगे।

- किसी विशेष कार्य पर परेशानी खड़ी हो सकती है, क्योंकि इसके लिए बजट का अनुमोदन जरूरी है। ऐसे में संभागायुक्त से विशेष अनुमति लेकर ही काम किया जा सकेगा।

बजट एक नजर में

प्रस्तावित व्यय: 57.84 करोड़ रुपए।

प्रस्तावित आय: 39.27 करोड़ रुपए।

यह सही है कि महाकाल मंदिर का बजट सुधार के बाद वापस आया है, लेकिन इसमें कुछ मदों में अधिक राशि बढ़ने के कारण अभी इसका अनुमोदन नहीं किया है। इसका एक बार और परीक्षण करा रहे हैं। कोष व लेखा विभाग के अधिकारियों से इसका परीक्षण करा रहे हैं। - एमबी ओझा, संभागायुक्त

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