वीडियो : भांग से श्रृंगार वाला देश का एकमात्र शिवलिंग है महाकालUpdated: Sun, 10 Sep 2017 06:43 PM (IST)

उज्जैन के भगवान महाकाल अपने अद्भुत रूपों और श्रृंगार के कारण देश-दुनिया में विख्यात हैं। इन्हीं में से एक है भांग श्रृंगार।

राजेश वर्मा, उज्जैन। उज्जैन के भगवान महाकाल अपने अद्भुत रूपों और श्रृंगार के कारण देश-दुनिया में विख्यात हैं। इन्हीं में से एक है भांग श्रृंगार। मान्यता है कि राजाधिराज भगवान महाकाल को भांग का भोग और श्रृंगार दोनों प्रिय है। जानकारों की मानें तो महाकाल देश के एकमात्र ऐसे शिवलिंग हैं, जिनका भांग से श्रृंगार होता है। अन्य स्थानों पर ज्योतिर्लिंगों का भांग से सिर्फ अभिषेक होता है। भांग से श्रृंगार की परंपरा अनादिकाल से चली आ रही है।

भगवान के श्रृंगार के लिए भांग को तैयार करने की प्रक्रिया भी काफी दिलचस्प है। श्रृंगार के लिए भांग को तैयार करने में करीब तीन घंटे लगते हैं। भांग को चुनने और तैयार करने की भी अपनी एक प्रक्रिया है, जिसे विशेषज्ञों द्वारा अंजाम दिया जाता है।

यह होती है प्रक्रिया

-सबसे पहले भांग की सूखी पत्तियों को पानी में उबाला जाता है। इससे इसमें मौजूद विषैले तत्व दूर हो जाते हैं।

-ठंडा होने के बाद पत्तियों को साफ पानी से धोया जाता है और पत्थर पर पीसा जाता है।

-गाढ़े मिश्रण को ही शिवलिंग पर लगाया जाता है। इसके लिए भी मंदिर में अलग से पुजारी है।

-लेपन तैयार करने की शुरुआती प्रक्रिया में करीब तीन घंटे लगते हैं। इसके बाद मंदिर में श्रृंगार में एक घंटा लगता है।

-जिस दिन श्रृंगार होता है, उसी दिन भांग तैयार की जाती है।

-एक बार के श्रृंगार में करीब पांच किलो भांग की आवश्यकता होती है। दो किलो सूखी पत्तियों से एक किलो भांग तैयार होती है।

-पत्तियां एक्साइज विभाग के माध्यम से 100 रुपए प्रति किलो खरीदी जाती हैं। तैयार भांग का दाम 500 रुपए प्रति किलो होता है।

-एक बार के श्रृंगार के लिए भक्त से नौ हजार रुपए शुल्क लिया जाता है।

-संध्या आरती में किया गया भांग का श्रृंगार अगले दिन तड़के भस्मारती से पहले उतारा जाता है।

कब-कब श्रृंगार

पहले खास मौकों पर ही महाकाल का भांग से श्रृंगार होता था। डेढ़ दशक में भक्त मनोकामना पूरी होने पर भी भांग से श्रृंगार कराने लगे हैं। श्रावण-भादौ मास में प्रतिदिन संध्या आरती में यह श्रृंगार होता है। पं. महेश पुजारी बताते हैं कि शोधित भांग से श्रृंगार करने पर ज्योतिर्लिंग का क्षरण नहीं होता। श्रृंगार उतरने के बाद कई भक्त इसे बतौर प्रसाद ग्रहण करते हैं।

माहेश्वरी परिवार तीन पीढ़ी से तैयार कर रहा भांग

महाकाल के श्रृंगार में जिस भांग का उपयोग होता है, उसे उज्जैन का माहेश्वरी परिवार तीन पीढ़ी से तैयार कर रहा है। तीसरी पीढ़ी के केतन माहेश्वरी ने बताया कि बाबा के लिए भांग तैयार करते वक्त शुद्धता का खास ख्याल रखा जाता है।

इन रूपों में भी सजते हैं राजा

पर्व विशेष पर भगवान का विविध श्रृंगार किया जाता है। जन्माष्टमी पर कृृष्ण श्रृंगार तो नागपंचमी पर शेषनाग रूप में राजा को सजाया जाता है। गणेष चतुर्थी पर गजानन रूप में महाकाल भक्तों को दर्शन देते हैं।

यह है भांग

भांग (वानस्पतिक नाम कैनिबिस इंडिका) एक प्रकार का पौधा है। इसकी पत्तियों को पीसकर भांग तैयार की जाती है। इसके पौधे अपने आप उगते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार और पश्चिम बंगाल में यह पौधा बहुतायत में पाया जाता है। उत्तर भारत में इसका इस्तेमाल स्वास्थ्य, हल्के नशे और दवा के रूप में भी होता है।

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