देश के कई स्थानों पर धूम मचाएगा रतलाम का गराडूUpdated: Thu, 26 Oct 2017 09:29 PM (IST)

मौसम के राजा 'गराडू" ने बाजार में दस्तक दे दी है। फिलहाल आवक कम और भाव अधिक है।

विवेक बाफना, रतलाम। मौसम के राजा 'गराडू" ने बाजार में दस्तक दे दी है। फिलहाल आवक कम और भाव अधिक है। इसके बावजूद शौकीन गराडू के जायके का लुत्फ उठाने से नहीं चूक रहे हैं। आवक बढ़ते ही मालवा की माटी में उत्पादित गराडू देश के कई स्थानों पर अपने अनूठे स्वाद से सभी को ललचाएगा।

वर्तमान में खेरची में 70 से 80 और मंडी में 50 से 60 रुपए प्रतिकिलो गराडू बिक रहा है। जिले में इस वर्ष 150 हेक्टेयर में गराडू का उत्पादन हो रहा है।

वर्तमान में गराडू की फसल बेहतर स्थिति में है। मौसम में ठंडक देर से घुलने के कारण गराडू के आकार में जरूर असर देखने को मिल रहा है। बांगरोद के किसान कमलेश धाकड़ और घनश्याम धाकड़ ने बताया कि 4 बीघा में गराडू का उत्पादन कर रहे हैं।

1 बीघा में 30 से 40 क्विंटल का उत्पादन होता है। गत वर्ष वायरस और अन्य बीमारी के कारण गराडू के उत्पादन पर असर पड़ा था, लेकिन इस बार गराडू की फसल ठीक है। मौसम में ठंडक की कमी के कारण गराडू का आकार (वजन) नहीं बढ़ा है। आगामी दिनों में ठंडक बढ़ते ही गराडू का वजन बढ़ जाएगा।

जगह-जगह सजेंगी दुकानें

आवक बढ़ते ही शहर में जगह-जगह गर्मागरम मसालायुक्त गराडू की दुकानें सजने लगेगी। शहर में 100 से अधिक स्थानों पर जायकेदार मसालायुक्त गराडू की दुकानें सजेंगी, जहां शौकीनों का शाम से रात तक मेला लगेगा। अलग-अलग स्थानों पर तले हुए मसालायुक्त गराडू 200 से 300 रुपए प्रतिकिलो के भाव से मिलेंगे।

मांगलिक आयोजन में भी

खानपान और सेहत की दृष्टि से शीत ऋतु को महत्वपूर्ण माना गया है। यही कारण है कि देवउठनी एकादशी से शुरू होने वाली मांगलिक आयोजनों की धूम में कई जगह मौसम का राजा गराडू आयोजकों की पहली पसंद रहेगा। कई आयोजक शादी-ब्याह सहित अन्य पार्टियों में मेहमानों को मसालायुक्त जायकेदार गराडू परोसकर आयोजन को खास बनाएंगे।

जिले के गांवों में उत्पादन

मालवा की हृदय स्थली रतलाम में तीन दशक पहले खेतलपुर के प्रगतिशील किसान रामचंद्र धाकड़ ने गराडू उत्पादन की शुरुआत की थी। वर्तमान में खेतलपुर सहित बांगरोद, शंकरगढ़, धमोत्तर, अम्बोदिया, रत्तागढ़खेड़ा, आलनिया, रूपाखेड़ा, मांगरोल आदि स्थानों पर सैकड़ों किसान गराडू का उत्पादन कर रहे हैं।

गुजरात-राजस्थान में विशेष मांग

शीत ऋतु में मेवे के रूप में उपयोग होने वाले गराडू की मांग हर जगह रहती है। जिले में उत्पादित गराडू इंदौर, उज्जैन, मंदसौर, नीमच, भोपाल, दिल्ली, बड़ौदा, अहमदाबाद, बांसवाड़ा आदि स्थानों पर भेजा जाता है।

लगातार बढ़ रहा उत्पादन

उद्यान विकास अधिकारी सूर्यप्रकाश शर्मा ने बताया कि जिले में गराडू का उत्पादन लगातार बढ़ रहा है। गत वर्ष 110 हेक्टेयर में गराडू का उत्पादन किया गया था, जो इस वर्ष बढ़कर 150 हेक्टेयर से अधिक हो गया है। वर्तमान में गराडू की फसल अच्छी स्थिति में है। कहीं से कोई बीमारी या वायरस की शिकायत नहीं मिली है।

ठंड के साथ बढ़ेगी आवक

सलीम भाई सब्जीफरोश ने बताया कि दीपावली से गराडू की आवक शुरू हुई है। वर्तमान में 4 से 5 क्विंटल की आवक हो रही है। मंडी में 50 से 55 रुपए किलो गराडू बिक रहा है। नवंबर के पहले सप्ताह से आवक में बढ़ोतरी होगी। सीजन में प्रतिदिन 2 से 3 टन आवक होगी। जिले की खपत के बाद मांग अनुसार गराडू अन्य स्थानों पर भेजे जाएंगे।

गराडू के पांच फायदे

-गर्मागर्म गराडू सर्दी की शाम-रात में खाने से आपको न केवल लाजवाब स्वाद मिलता है। गर्माहट के साथ-साथ शरीर के लिए आवश्यक ऊर्जा भी देता है।

- यह फाइबर याने रेशे से भरपूर होता है, जो कोलेस्ट्रॉल को कम करने में मदद करता है। खास तौर से यह बुरे कोलेस्ट्रॉल को हटाने में मदद करता है। इसके अलावा फाइबर आपके पाचन तंत्र को भी बेहतर बनाता है और कब्ज में फायदेमंद होता है।

- गराडू कॉपर, आयरन, कैल्शियम, पोटेशियम, मेंगनीज, फॉस्फोरस के अलावा कई पोषक तत्वों से भरपूर होता है, जो आपके स्वास्थ्य और सेहत के लिए बेहद फायदेमंद होते हैं।

-गराडू में विटामिन्स के साथ एंटी ऑक्सीडेंट भी भरपूर मात्रा में होते हैं, जो न केवल मानसिक तनाव को कम करते हैं, अपितु आपको जवां दिखने में भी मदद करता हैं। यह झुर्रियों के आने की प्रक्रिया को धीमा करने में सहायक है।

-रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के लिए भी गराडू फायदेमंद हैं। इसके अलावा यह हड्डियों के विकास में भी सहायक हैं और शरीर की चोट या फिर घाव को जल्दी भरने में सहायक है।

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