जननी एक्सप्रेस नहीं पहुुंची, प्रसूता को रिक्शा में अस्पताल ले जाना पड़ाUpdated: Mon, 04 Jul 2016 07:07 PM (IST)

प्रसूता की पीड़ा पड़ोस की महिला से देखी नहीं गई और उसे रिक्शा चलाकर तीन किमी दूर अस्पताल ले गई।

करेली/नरसिंहपुर। कॉल सेंटर को बार-बार फोन करने के बाद भी जब जननी एक्सप्रेस नहीं पहुंची तब दर्द से कराह रही प्रसूता की पीड़ा पड़ोस की महिला से देखी नहीं गई और उसे रिक्शा चलाकर तीन किमी दूर अस्पताल ले गई।

मामला करेली के महात्मा गांधी वार्ड का है। जहां देररात एक महिला को प्रसव पीड़ा होते ही उसके परिजनों ने कॉल सेंटर को जननी एक्सप्रेस बुलाने फोन लगाया। लेकिन एम्बुलेंस नहीं आई। इसके बाद एम्बुलेंस न आने पर उन्होंने बार-बार फोन किए, लेकिन दो घंटे तक एम्बूलेंस नहीं आई। इस दौरान महिला की प्रसव पीड़ा बढ़ गई। जिसे देखते ही उसके पड़ोस में रहने वाली एक महिला ने रिक्शा में प्रसूता और उसकी सास को बैठाया और खुद रिक्शा चलाकर महिला को तीन किमी दूर अस्पताल ले गई।

जानकारी के अनुसार महात्मा गांधी वार्ड निवासी कांता मेहरा को रविवार रात करीब 12 बजे प्रसव पीड़ा होने लगी, जिसके बाद परिजनों ने कॉल सेंटर को फोन लगाया, जिसने तुरंत ही एम्बुलेंस भेजने कहा, लेकिन वाहन नहीं भेजा। प्रसूतिका की प्रसव पीड़ा बढ़ती जा रही थी। तभी गुड्डी बाई जाटव और रति बाई ने पास में साईकिल रिक्शा वाले को अस्पताल चलने को कहा परंतु उसने भी असमर्थता बताते हुए कहां कि आप मेरे रिक्शे को ले जाइये मै नहीं जा सकता। तब गुड्डी बाई जाटव खुद पीड़ित महिला कांता मेहरा और उसकी सास सब्बों बाई के साथ एक अन्य महिला को बैठाकर अंधेरी रात में लगभग ढाई बजे सामुदायिक स्वस्थ्य केंद्र करेली पहुंच गई। गुड्डी बाई ने बताया कि रास्ते में उसे 108 एम्बूलेंस भी मिली परंतु उसने भी उनकी मदद नहीं की।

भगवान बनकर आई गुड्डी बाई

करेली अस्पताल के डॉक्टर मधुसूदन उपाध्याय ने बताया कि एम्बुलेंस समय से क्यों नहीं पहुंची यह तो जांच का विषय है, लेकिन प्रसूता के लिए गुड्डी बाई भगवान बनकर आई। जिसने हिम्मत दिखाकर कांता को समय से अस्पताल पहुंचाया। जच्चा-बच्चा को संक्रमण न हो इसलिए दोनों को नरसिंहपुर रेफर किया गया है।

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