वाहन चोर गिरोह से मिले एक करोड़ रुपए के 11 वाहनUpdated: Wed, 09 Aug 2017 08:26 AM (IST)

एक करोड़ के 11 लग्जरी वाहनों के मामले का खुलासा करते हुए एसपी ने सिंह ने बताया कि चोर वाहनों को चुराते थे।

मुरैना। पुलिस द्वारा पकड़े गए करीब एक करोड़ के 11 लग्जरी वाहनों के मामले का खुलासा करते हुए एसपी ने सिंह ने बताया कि चोर वाहनों को चुराते थे। इसके बाद कबाड़े की दुकानों से एक्सीडेंट में कबाड़ हुए या पुराने वाहनों के चेस को दस्तावेजों के साथ खरीद लेते थे। इसके बाद गिरोह में शामिल एक मिस्त्री से पुराने व कबाड़ के वाहनों के चेसिस पर चुराए गए वाहनों की बाडी व इंजन रख देते थे। इसके बाद नया वाहन दस्तावेजों के साथ तैयार हो जाता था और उसे लोगों को बेच देते थे।

इस तरह करते थे चोरी और बेचते थे वाहन

चूंकि चोर अंतरराज्यीय हैं और यूपी व बिहार के लोग भी इसमें शामिल थे। इसलिए चोर किसी भी कंपनी का या मॉडल का वाहन चुराते थे। उसके बाद अपने कार्य वाले क्षेत्र में ये लोग कबाड़े की दुकानों व बीमा कंपनियों के यहां चुराए गए वाहन के मुताबिक एक्सीडेंट में कबाड़ हुए या पुराने वाहन को तलाशते थे।

कबाड़े वाले के यहां यदि वाहन मिल जाता तो उसे पैसे देकर उससे चेसिस व दस्तावेज खरीद लेते। यदि बीमा कंपनी के यहां एक्सीडेंटल वाहन मिलता तो उसे भी सांठगांठ कर खरीद लेते। इसके बाद मिस्त्री के माध्यम से चोरी के वाहन को उस चेसिस पर रखवा देते थे। इसके बाद उनके पास वैध दस्तावेज भी होते और वे वाहन को आसानी से बेच लेते थे।

यह भी करते थे चोर

पुलिस के मुताबिक यदि कबाड़े में या फिर बीमा कंपनी के पास कबाड़े में कोई वाहन मिल जाता, लेकिन उसका चेसिस नहीं होता था तो वे उस वाहन के दस्तावेजों को ही खरीद लेते थे। इसके बाद वे चोरी किए गए वाहन की चैस पर कबाड़े वाले वाहन का चैस नंबर डलवा देते थे।

आरटीओ में दस्तावेज तैयार कराता था एक आरोपी

आरोपियों में राजेन्द्र थापक नामक चोर का काम ही चोरी के वाहनों के दस्तावेजों को दुरुस्त कराना था। बताया जाता है कि आरोपी का आरटीओ कार्यालयों में अच्छी सांठगांठ थी, जिससे वह बड़ी आसानी से दस्तावेज तैयार करा लेता था।

खरीदने वालों को पता नहीं चलता था कि वाहन चोरी का है

चोरी के वाहन को जो लोग खरीदते थे, वे दस्तावेज व चैस नंबर ही देखते थे। इसके बाद वाहनों का चोर आरटीओ से स्वामित्व का भी स्थानांतरण करा देते थे। इसलिए वाहन खरीदने वालों को शक नहीं होता था।

असली मालिक के पास नहीं पहुंच पाएंगे वाहन

चोरों ने चुराए गए वाहन को कबाड़े की चेसिस पर रखकर नए बना दिए। साथ ही चुराए गए वाहन की मूल चेसिस को कबाड़े वालों के यहां बेच दिया है या फिर नष्ट कर दिया है। ऐसे में पुलिस अब इन वाहनों को उनके मूल मालिकों को तलाश नहीं पाएगी। क्योंकि या तो वाहन का नंबर होता या फिर चेसिस नंबर। तभी पुलिस उनके मालिकों को खोज पाती।

अंतरराज्यीय चोरों के नाम भी बताए

पुलिस ने जब आरोपी मुलायम सिंह, राजेन्द्र थापक व सुनील शर्मा से पूछताछ की तो उन्होंने अंतरराज्यी चोरों के नाम बताए जो इस गैंग में शामिल है। इनमें मेरठ का समीर खान व इमरान, पटना का मुकेश, डबरा का रामू व स्थानीय चोर दुर्गेश व, गौरव शर्मा, भरत जाटव के नाम बताए। चोरों ने बताया कि गौरव शर्मा के पास एक सफारी, पग्गा सरदिार निवासी विंडसर हिल के पास हुंडई वरना, दुर्गेश शर्मा निवासी सबलगढ़ के पास स्विफ्ट कार होना बताया है। पुलिस इन लोगों की तलाश कर रही है।

लग्जरी वाहनों की सबसे बड़ी बरामदगी

मुरैना पुलिस ने अभी तक वाहन चोरों से केवल बाइक ही बड़ी संख्या में बरामद की थी, लेकिन यह पहली बार है कि चंबल व ग्वालियर संभाग में पहली बार इतनी संख्या में एक साथ इतनी संख्या में लग्जरी वाहन बरामद किए हैं।

कौन से वाहन कितने

- स्कॉर्पियोः 2

- ईनोवाः 1

- हुंडई आईटेनः 1

- सिफ्टः 1

- सफारीः 1

- बोलेरोः 3

- ईको स्पोर्टः 2

चोरों से बरामद वाहनों के मूल मालिकों को तलाश करने में परेशानी आएगी। क्योंकि चुराए गए वाहनों के न तो असली चेस नंबर हैं और न ही रजिस्ट्रेशन नंबर। चोरों से पता करेंगे कि कौन सा वाहन किस क्षेत्र से और कहां से चुराया है। साथ ही वाहनों के इंजन नंबर से भी पता करने का प्रयास करेंगे। अजय चानना, टीआई सिविल लाइन

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