मुरैना के ईको सेंटर से 5 साल में चुराए थे 50 कछुएUpdated: Fri, 08 Sep 2017 08:13 PM (IST)

कछुओं की तस्करी के दाग अभयारण्य में पदस्थ रहे पूर्व अधिकारियों के दामन पर भी दिखाई दे रहे हैं।

मुरैना। देवरी घड़ियाल केंद्र पर कछुआ संरक्षण कार्यक्रम के तहत पलने वाले कछुओं की तस्करी के दाग अभयारण्य में पदस्थ रहे पूर्व अधिकारियों के दामन पर भी दिखाई दे रहे हैं। टाइगर स्ट्राइक फोर्स सागर को आरोपी कैलाशी ने खुद यह बात बताई है कि कछुआ चोरी का काम वह अभी से नहीं कर रहा था, बल्कि देवरी ईको सेंटर पर कछुआ संरक्षण शुरू होने के दो साल बाद ही उसने यहां से कछुए चुराने शुरू कर दिए थे।

इन कछुओं की कीमत अंतरराष्ट्रीय बाजार में 5 लाख और इससे भी ज्यादा होती है, लेकिन आरोपी को महज हजार दो हजार रुपए ही मिलते थे। आरोपी ने कबूला है कि उसने 5 साल में देवरी ईको सेंटर से 5-10 नहीं बल्कि 50 कछुए चोरी किए हैं।

चोरी होने वाले कछुओं की संख्या को यहां पदस्थ अधिकारी रिकॉर्ड में विभिन्न् कारण बताकर खुर्द-बुर्द कर दिया करते थे। ऐसे में अब यहां तैनात रहे अधिकारियों की भूमिका भी इस मामले में सदिग्ध हो गई है। इस संदेह के लिए वन अधिकारियों के पास कारण भी पर्याप्त हैं। 5 साल में चोरी गए कछुओं की कीमत ढाई करोड़ तक आंकी जा रही है।

10 साल से कैलाशी का ठेका रिन्यू कर रहे थे अधिकारी

इस पूरे मामले में अभयारण्य में पदस्थ रहे अधिकारियों की भूमिका एक और वजह से संदिग्ध हो गई है। वन विभाग मुरैना ने जो जांच शुरू की है उसमें पता चला है कि कैलाशी को घड़ियालों के लिए मछली सप्लाई का ठेका साल 2007 में टेंडर प्रक्रिया के तहत मिला। इसके बाद कैलाशी अभयारण्य के अधिकारियों को इस कदर रास आया कि पूरे 10 सालों तक अधिकारी दोबारा टेंडर बुलाने की बजाय कैलाशी का ही ठेका रीन्यू करते रहे। वन अधिकारी इस बड़ी अनियमितता का पता लगाने में जुटे हुए हैं।

इनका कहना है

आरोपी ने कबूल किया है कि वह कछुओं की चोरी पिछले 5 साल से कर रहा था। इस दौरान उसने 45 से 50 कछुए चोरी करके बेचने की बात कबूली है। जिनके साइज के हिसाब से उसे महज हजार से 2 हजार रुपए मिलते थे। इसमें स्थानीय कर्मचारियों की भूमिका के बारे में हम कुछ नहीं सकते। यह कैसे हो रहा था, इसकी जांच स्थानीय स्तर पर करवाए जा रही होगी।

श्रद्धा पंद्रेश, एसडीओ टाइगर स्ट्राइक फोर्स सागर

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