विदेश में बैठे पति से वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग पर कराई पत्नी की सुलह, फिर बने एक-दूजे केUpdated: Sat, 09 Sep 2017 06:03 PM (IST)

सीजेएम ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए मामले की सुनवाई की और अलग रह रहे पति-पत्नी में सुलह कराई।

खरगोन। बेडरूम के निजी पलों को लेकर उपजे विवाद पति-पत्नी के बीच मनमुटाव का कारण बना। अलगाव इतना बढ़ा कि दोनों अलग हो गए। तीन साल पहले अपने जुड़वा दो बच्चों को लेकर पत्नी खरगोन मायके आ गई। वहीं पति नौकरी के लिए बहरीन (सउदी अरब) चल गया। खरगोन सीजेएम कोर्ट की पहल रंग लाई। जज ने स्वयं आधुनिक संसाधन से काउंसलिंग की। वीडियो पर मुस्कुराते चेहरे देख पति-पत्नी के बीच फिर मोहब्बत का अंकुर फूटा।

शनिवार को ये युवती अपने बच्चों के साथ पति के पास विदेश रवाना हो गई। संभवत: विदेश में बैठे पति से काउंसलिंग का ये देश में पहला मामला है। गौरतलब है कि यह केस अत्याधुनिक संचार व्यवस्था और 16 वर्ष पूर्व बने संचार कानून का बेहतरीन इस्तेमाल माना जा रहा है।

यह था मामला

इस मामले में पैरवी कर रही अभिभाषक प्रीतिबाला ठाकुर ने बताया कि नवंबर 2009 में जबलपुर निवासी अनिल (परिवर्तित नाम) (28) की शादी शहर की सीमा (परिवर्तित नाम) (24) से हुई थी। दोनों को जुड़वा बच्चे हुए। धीरे-धीरे दोनों के बीच उम्मीदों और निजी पलों की जिद पर विवाद हुआ। दोनों अलग हुए। अनिल बहरीन चला गया। इधर सीमा अपने पिता के पास पहुंची। शुरूआत में ये केस जबलपुर कोर्ट में फाइल किया गया। 2014 में ये केस अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायालय व सीजेएम कोर्ट में पहुंचा। इस केस में अभिभाषक सीएस नाईक ने भी पैरवी की। अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश मैरी मा. फ्रांसिस डेविड ने भी सुनवाई की।

कोर्ट के सामने यह थी चुनौती

अभिभाषक ठाकुर ने बताया कि इस पूरे मामले में सीजेएम गंगाचरण दुबे ने विशेष रुचि ली। सबसे बड़ी चुनौती पति को नोटिस तामिल करवाने की थी। एक अन्य देश में नोटिस तामिल कराने के लिए दोनों दूतावासों की सहमति जरूरी थी। सीजेएम दुबे ने सूचना एवं प्रौद्योगिकी कानून का सूझबूझ से उपयोग किया। मेल के जरिये नोटिस भेजे गए। स्काइप एप्लीकेशन के माध्यम से अनिल से कई बार बात की। यह बात सीमा की मौजूदगी में हुई। अंतत: दुबे ने अनिल को निर्देश दिए कि वे अपनी पत्नी और बच्चों के लिए फ्लाइट टिकट भेजे।

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