बांध में पानी रोके जाने से सूखी पड़ी नर्मदा, श्रद्धालु गहराई में जाकर स्नान करने पर मजबूरUpdated: Sat, 11 Nov 2017 03:58 AM (IST)

बांध प्रबंधन की हठधर्मिता और पानी रोकने के कारण नर्मदा सूखी पड़ी है।

ओंकारेश्वर। बांध प्रबंधन की हठधर्मिता और पानी रोकने के कारण नर्मदा सूखी पड़ी है। चरणबद्ध किए जा रहे आंदोलनों के बाद भी शासन-प्रशासन और बांध प्रबंधन पर कोई असर नहीं हो रहा है। घाटों पर पानी नहीं होने के कारण श्रद्धालु नर्मदा की गहराई में जाकर स्नान करने को मजबूर है। ऐसे में कभी भी किसी भी समय घटना-दुर्घटना होने से इंकार नहीं किया जा सकता है।

यह बात महंत मंगलदास त्यागी ने श्री नर्मदा महासंग्राम संगठन द्वारा जेपी चौक पर जारी अनिश्चतकालीन धरना प्रदर्शन को संबोधित करते हुए कही। उन्होंने कहा कि पिछले तीन महीनों से नर्मदा का जलस्तर एक समान रखने को लेकर चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है। इसके बावजूद किसी भी स्तर पर ध्यान नहीं दिया जा रहा है।

महंत त्यागी ने मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नमामि देवी नर्मदे यात्रा के दौरान हजारों संत-महात्माओं की उपस्थिति में घोषणा की थी कि नर्मदा अविरल बहती रहेगी। इस घोषणा पर भी अभी तक अमल नहीं हो सका है। महंत त्यागी ने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि मुख्यमंत्री नर्मदा नदी को संरक्षित करने के लिए नर्मदा सेवा परिक्रमा यात्री भी निकाल चुके हैं।

उन्होंने आक्रोश व्यक्त करते हुए कहा कि जब नर्मदा में पानी ही नहीं है तो नर्मदे सेवा यात्रा भी सिर्फ दिखावा ही साबित हुआ है। यदि मुख्यमंत्री स्वयं अपने आपको नर्मदा भक्त कहते हैं तो उन्हें नर्मदा की धारा को मूल स्वरूप में लौटाने की ओर भी ध्यान देना जरूरी है। महंत त्यागी ने कहा कि सरदार सरोवर बांध भरने के लिए ओंकारेश्वर बांध से बिजली उत्पादन कर पानी छोड़ दिया गया। अब बांध प्रबंधन ने पानी नहीं होने का बहाना बनाकर नर्मदा को पूरी तरह सूखा दी है जो न्यायसंगत नहीं है।

दोनों ही मुख्यमंत्री जिम्मेदार

महंत मंगलदास त्यागी ने कहा कि मुख्यमंत्री शिवराजसिंह चौहान ने नमामि देवी नर्मदे यात्रा के दौरान अरबों रुपए खर्च कर दिए। वहीं पूर्व मुख्यमंत्री दिग्विजयसिंह भी अपनी पत्नी के साथ नर्मदा परिक्रमा यात्रा पर निकले हैं। जब नर्मदा में पानी ही नहीं है तो वे भी किसकी परिक्रमा कर रहे हैं। दोनों ही मुख्यमंत्रियों ने नर्मदा नदी का दोहन किया है। परिक्रमा के नाम पर राजनीति की जा रही है। आज जो मां नर्मदा की स्थिति है इसके लिए पूर्ण रूप से दोनों ही मुख्यमंत्री जिम्मेदार हैं।

भाजपा पार्षद प्रकाश परिहार ने कहा कि नर्मदा नदी में पानी छोड़ने के लिए तीन माह से चरणबद्ध आंदोलन किया जा रहा है। वहीं बांध प्रबंधन पानी छोड़ने के लिए तैयार नहीं है। उन्होंने कहा वर्तमान में अनिश्चितकालीन धरना प्रदर्शन किया जा रहा है। इसके बाद भी नर्मदा की धारा को पुनः अपने मूल स्वरूप में नहीं लौटाया गया तो उग्र आंदोलन, चक्काजाम, जल सत्याग्रह जैसे कदम उठाने से भी लोग पीछे नहीं हटेंगे।

जलीय जीवों के अस्तित्व पर गहराने लगा संकट

उल्लेखनीय है कि ओंकारेश्वर बांध से नर्मदा की जलधारा रोकने के कारण घाटों और तटों पर बसने वाले अनेक गांवों में जलसंकट उत्पन्न हो जाता है। नर्मदा नदी करोड़ों लोगों की आस्था का प्रतीक भी है। शास्त्रों में भी कहा गया है कि नर्मदा स्नान से अनेक जन्मों के पाप धुल जाते हैं। ओंकारेश्वर में 10 वर्षों से जलधारा को रोककर उसके मूल स्वरूप को ही समाप्त कर दिया गया है। वहीं नर्मदा नदी के अंदर पलने वाले जलीय जीवों का अस्तित्व भी संकट में है। शासन-प्रशासन, बांध प्रबंधन और जनप्रतिनिधियों को भी नर्मदा की जलधारा बनाए रखने की ओर ध्यान देने की जरूरत है।

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