भगवान ओंकारेश्वर लगाएंगे ओंकार पर्वत की परिक्रमाUpdated: Sat, 12 Aug 2017 03:58 AM (IST)

सोमवार को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी निकाली जाएगी जो दोपहर 2 से रात्रि 9.30 बजे तक नगर भ्रमण करेगी।

ओंकारेश्वर। सोमवार को ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी निकाली जाएगी जो दोपहर 2 से रात्रि 9.30 बजे तक नगर भ्रमण करेगी। इस दौरान भगवान ओंकारेश्वर ओंकार पर्वत की परिक्रमा भी लगाएंगे। सवारी में शामिल होने आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर ट्रस्ट द्वारा भंडारे का आयोजन रखा गया है।

मंदिर के सहायक कार्यपालन अधिकारी अशोक महाजन और सवारी प्रभारी आशीष दीक्षित ने बताया कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी निकलने से पूर्व पंडित-पुजारियों द्वारा पूजापाठ और आरती की जाएगी।

दोपहर 2 बजे भोलेनाथ की पंचमुखी मुखौटे को पालकी में विराजित कर नगर भ्रमण के लिए रवाना किया जाएगा। सवारी आदि गुरु शंकराचार्य गुफा से होते हुए 2.30 बजे कोटितीर्थघाट पहुंचेगी। यहां पंचमुखी मुखौटे को नर्मदा स्नान कराने के पश्चात पंडित राजराजेश्वर दीक्षित के आचार्यत्व में नगर के ब्राह्मणों द्वारा सूक्ष्म पूजन-अभिषेक किया जाएगा।

नौका विहार करती हुई सवारी शिवपुरी मुख्य बाजार से निकलकर पुराने झूला पुल के नीचे से होती हुई ओंकार मठ के सामने से बर्फानीधाम आश्रम, ऋणमुक्तेश्वर मंदिर से शाम 6.30 बजे नर्मदा-कावेरी संगमघाट पहुंचेगी जहां पंचमुखी मुखौटे का महाभिषेक किया जाएगा।

यहां से सवारी ओंका पर्वत की परिक्रमा के लिए रवाना होगी। सवारी गौरी सोमनाथ मंदिर, लेटे हनुमान मंदिर, राज राजेश्वरी संस्थान, नक्षत्र गार्डन, ओंकार बांध के सामने से रात्रि 8 बजे नर्मदा तट पहुंचेगी।

पदगामी पुल से निकलकर सवारी रात्रि 9.30 बजे मंदिर पहुंचेगी। शयन आरती पश्चात भोलेनाथ विश्राम करेंगे। इधर सोमवार को आने वाले श्रद्धालुओं के लिए मंदिर ट्रस्ट की ओर से भंडारा प्रसादी का आयोजन भी मंदिर परिसर में रखा गया है।

मठ-मंदिरों में स्वागत-सत्कार

उल्लेखनीय है कि ओंकारेश्वर ज्योतिर्लिंग की सवारी भादौ माह के दूसरे सोमवार को प्रत्येक वर्ष ओंकार पर्वत की परिक्रमा लगाती है। इसमें बड़ी संख्या में बाहर से आए श्रद्धालुओं के साथ ही स्थानीय नागरिक भी शामिल होते हैं।

सवारी निकलने के दौरान ओंकार पर्वत पर स्थित मठ-मंदिरों तथा आश्रमों द्वारा भी स्वागत-सत्कार किया जाता है। अनेक स्थानों पर भगवान को भोग लगाने के पश्चात फल, मिठाई सहित अन्य प्रकार के मेवा-मिष्ठानों का वितरण सवारी में शामिल श्रद्धालुओं को प्रसादी के रूप में किया जाताा है।

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