कृत्रिम हाथ लगते ही चहक उठी अल्फिया, लिखा अपना नामUpdated: Mon, 09 Oct 2017 07:29 PM (IST)

बचपन से दिव्यांग छात्रा को जैसे ही कृत्रिम हाथ मिला, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा।

खंडवा। बचपन से दिव्यांग छात्रा को जैसे ही कृत्रिम हाथ मिला, उसकी खुशी का ठिकाना नहीं रहा। उसने उसी हाथ से अपना नाम लिखा और कहा- अब मैं बहुत खुश हूं, डांस करना चाहती हूं, दोनों हाथों से पेंटिंग करूंगी। ऐसा लग रहा है कि जीवन में जो कमी थी, वह पूरी हो गई।

एमएलबी स्कूल की छात्रा अल्फिया अश्फाक अली आठवीं में पढ़ती है। बचपन से ही उसका बायां हाथ नहीं है। शिक्षक हिमांशु गंगराड़े ने रोटरी क्लब के सदस्यों को इस बारे में जानकारी दी। रोटरी क्लब के सदस्य सोमवार को एमएलबी स्कूल पहुंचे। यहां छात्रा को कृत्रिम हाथ लगाया गया।

इस हाथ से अल्फिया ने अपना नाम लिखा और पेंटिंग की। जाकिर हुसैन वार्ड निवासी छात्रा के पिता अश्फाक फूलों का व्यापार करते हैं। उन्होंने कहा कि आज का दिन मेरे जीवन में बहुत खास है। हमेशा बेटी के एक हाथ को देखकर चिंता लगी रहती थी। अब मैं बहुत खुश हूं।

शिक्षिका बनने की चाह

अल्फिया शिक्षिका बनना चाहती है। अभी वह कम्प्यूटर सीखना चाहती है, इसके साथ ही डांस और चित्रकला भी करना चाहती है। स्कूल प्राचार्य एस. नागोत्रा ने बताया कि छात्रा मेधावी है। 7वीं में उसने 93.5 प्रतिशत अंक हासिल किए।

कैलिफोर्निया से आया हाथ

रोटरी क्लब के लोकेश झंवर ने बताया कि कृत्रिम हाथ कैलिफोर्निया की कंपनी बनाती है। इसकी कीमत करीब एक हजार डॉलर (करीब 65 हजार रुपए) है। क्लब सदस्यों के डोनेशन के आधार पर यह कृत्रिम हाथ मिलते हैं।

350 ग्राम का है कृत्रिम हाथ

इस कृत्रिम हाथ का वजन मात्र 350 ग्राम है। इसके पंजे में पांच ऊंगलियां हैं। इनमें से तीन ऊंगलियां फिक्स और दो एडजेस्टेबल और मूविंग हैं। इसके साथ ही कलाई भी एडजेस्टेबल है। इसकी मदद से चाय पीना, चम्मच से भोजन करना, वाहन चलाना सहित अन्य काम किए जा सकते हैं। एडजेस्टेबल होने के कारण आयु बढ़ने और शारीरिक बनावट बदलने के बाद भी इसका नियमित ढंग से उपयोग किया जा सकता है।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.