8वीं पास और 10वीं फेल दिव्यांग संभालेंगे स्टेशनरी दुकानUpdated: Fri, 08 Sep 2017 07:13 PM (IST)

प्रदेश के 8 हजार हायर सेकंडरी स्कूलों के पास स्टेशनरी की दुकानें खोली जाएंगी। यहां रियायती दरों पर कॉपी-किताबें मिलेंगी।

खंडवा। मध्यप्रदेश के 8 हजार हायर सेकंडरी स्कूलों के पास स्टेशनरी की दुकानें खोली जाएंगी। यहां रियायती दरों पर कॉपी-किताबें मिलेंगी। शिक्षा विभाग दुकानें खोलकर इनके संचालन का जिम्मा दिव्यांगों को देगा। 8वीं पास और 10वीं फेल दिव्यांग इन दुकानों को संभालेंगे। इससे प्रदेश के 8 हजार दिव्यांगों को रोजगार मिलेगा और बच्चों को सस्ती दरों पर स्टेशनरी मिलेगी। इसके साथ ही प्रत्येक हायर सेकंडरी स्कूल में आगामी शिक्षा सत्र से प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराए जाएंगे। इससे विद्यार्थियों में नेतृत्व क्षमता और संगठन शक्ति का विकास हो सकेगा।

ये बातें स्कूल शिक्षा मंत्री विजय शाह ने शुक्रवार को खंडवा के सूरजकुंड हायर सेकंडरी स्कूल में कहीं। वे नवनिर्वाचित छात्रा संगठन के शपथ विधि समारोह में हिस्सा लेने आए थे। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों को किताबें तो सरकार निशुल्क दे देती है लेकिन कॉपियां खरीदने के लिए विद्यार्थियों को करीब एक हजार रुपए खर्च करना पड़ते हैं। हम उन्हें करीब 700 रुपए में ये किताबें दिलाएंगे।

इसके लिए प्रदेश सरकार प्रत्येक सरकारी हायर सेकंडरी स्कूल के पास एक स्टेशनरी खोलेगी। यहां दिव्यांगों को नौकरी दी जाएगी। कलेक्टर रेट से उन्हें वेतन का भुगतान होगा। वे आसपास के प्रायमरी व मिडिल स्कूलों में भी शिक्षण सामग्री बेच सकेंगे। इस पर उन्हें अतिरिक्त कमीशन दिया जाएगा।

यह होगा लाभ

- विद्यार्थियों को बाजार में मिलने वाली किताब, कॉपी व स्टेशनरी सस्ती दरों पर उपलब्ध होंगी।

- 10वीं फेल दिव्यांगों को कई जगह रोजगार नहीं मिलता, इस योजना से वे रोजगार से जुड़ सकेंगे।

कॉलेज में चुनाव नहीं, स्कूल में तैयारी

मंत्री शाह ने खंडवा के सूरजकुंड स्कूल में हुए चुनाव पर प्रसन्नता जाहिर करते हुए आगामी सत्र से प्रदेश के सभी हायर सेकंडरी स्कूलों में प्रत्यक्ष प्रणाली से चुनाव कराने की घोषणा की। इसके पायलेट प्रोजेक्ट में खंडवा शहर के छह स्कूलों को रखने की बात कही। इस बीच यह भी चर्चा रही कि एक ओर जहां प्रदेश सरकार कॉलेजों में छात्रसंघ चुनाव नहीं करा पा रहा है, वहीं स्कूलों में यह पहल कैसे कामयाब होगी।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.