जुडवां बच्चों का अलग-अलग अस्पतालों में जन्म, महिला व बच्चे की मौतUpdated: Sat, 12 Aug 2017 10:28 PM (IST)

समय रहते न तो जननी एक्सप्रेस मिली और न ही इलाज के लिए डॉक्टर। इसकी वजह से उसकी एक बच्ची की मौत हो गई।

बालाघाट। एक गर्भवती महिला को दो सरकारी अस्पतालों में सही से इलाज नहीं मिल सका। समय रहते न तो जननी एक्सप्रेस मिली और न ही इलाज के लिए डॉक्टर। इसकी वजह से उसकी एक बच्ची की मौत हो गई। जिला अस्पताल लाते समय महिला की भी मौत हो गई। दूसरे बच्चे का इलाज चल रहा है। मामला बालाघाट गढ़ी थाना क्षेत्र के खमरिया गांव का है।

गढ़ी अस्पताल में पहली डिलेवरी, बच्ची की मौत

गढ़ी थाना क्षेत्र के खमरिया गांव निवासी सुषमा उईके पति अनंतराम को शुक्रवार की शाम 4 बजे पेट में दर्द उठा तो जननी एक्सप्रेस के लिए फोन लगाया गया, लेकिन जननी उपलब्ध नहीं हो सकी तो परिजन निजी वाहन से गढ़ी अस्पताल लेकर पहुंचे।

यहां डॉक्टर नहीं होने पर नर्सों ने डिलेवरी की और एक बच्ची ने जन्म दिया। लेकिन आधे घंटे बाद ही उसकी मौत हो गई। महिला की हालत बिगड़ रही थी और उसके पेट में एक और बच्चा था इसलिए नर्सों ने उसे बैहर अस्पताल रेफर कर दिया।

बैहर अस्पताल में दूसरे बच्चे का जन्म

फिर जननी एक्सप्रेस नहीं मिली तो प्राइवेट वाहन से प्रसूता को बैहर अस्पताल लाया गया। यहां भी डॉक्टर मौजूद नहीं थे, नर्सों ने ही दूसरे बच्चे की डिलेवरी की। यहां एक बालक को जन्म दिया। इसके बाद महिला की हालत और बिगड़ गई। तब नर्सों ने जिला अस्पताल के लिए रेफर कर दिया।

जिला अस्पताल जाते समय प्रसूता ने तोड़ा दम

इस बार महिला को जिला अस्पताल रेफर किया गया। लेकिन जननी एक्सप्रेस फिर नहीं मिली। तब शनिवार सुबह 4 बजे प्राइवेट वाहन से अस्पताल ले जाया गया लेकिन महिला ने रास्ते में ही दम तोड़ दिया।

वक्त पर जननी की सुविधा न मिलने और गढ़ी अस्पताल व बैहर अस्पताल में डॉक्टर न होने के कारण सुषमा की मौत हो गई।

-अंतराम उइके, प्रसूता का पति।

कलेक्टर के निर्देशन में चार सदस्सीय टीम का गठन करने के आदेश दिए हैं। जांच में दोषी पाए जाने वाले संबंधितों के खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी।

-गौरीशंकर बिसेन, कृषि मंत्री प्रदेश शासन।

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