बच्चे को गोद लेने लगी लाइन, बेटी होती तो एक तिहाई भी नहीं आतेUpdated: Wed, 11 Oct 2017 11:05 PM (IST)

उसे गोद लेने 36 घंटे में 30 से अधिक लोगों ने एल्गिन अस्पताल प्रबंधक से गुहार लगाई।

जबलपुर। जिस बच्चे को उसकी मां ने मदनमहल स्टेशन पर लावारिस छोड़ दिया, उसे गोद लेने 36 घंटे में 30 से अधिक लोगों ने एल्गिन अस्पताल प्रबंधक से गुहार लगाई। वह लड़का है इसलिए अस्पताल में उसे गोद लेने वालों की भीड़ लग गई। इसी जून महीने की आखिरी सप्ताह में रेलवे स्टेशन के मालगोदाम में एक नवजात बच्ची मिली थी, लेकिन उसे गोद लेने 10 लोग भी नहीं पहुंचे थे।

हालांकि बच्चा गोद देने के अधिकार किसी भी अस्पताल के पास नहीं हैं, इसके बाद भी लोगों ने यही समझा कि उन्हें आसानी से बच्चा मिल जाएगा। गोद लेने के लिए विधायकों व नेताओं के फोन भी अस्पताल प्रबंधन के पास पहुंचे। लोगों ने तो यहां तक कहा कि डॉक्टर साहब, आउट ऑफ द वे जाकर हमें यह बच्चा गोद दे दीजिए, हमें तो यही बच्चा चाहिए।

वकील, नेताओं की एप्रोच

एल्गिन अस्पताल में वकील, नेताओं की एप्रोच पहुंच रही है। वे अपने मित्रों, रिश्तेदारों को बच्चा गोद दिलवाना चाह रहे हैं। कुछ वकील भी बच्चा गोद लेने के इच्छुक हैं।

ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन, एक साल की वेटिंग

बच्चा गोद लेने के लिए सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी में ऑनलाइन रजिस्ट्रेशन कराना होता है। इसमें भी एक साल की प्रतीक्षा सूची है। रजिस्ट्रेशन के बाद संबंधित व्यक्ति का वेरीफिकेशन होता है। उसके बाद उसे तीन बच्चों की च्वॉइस दी जाती है। इसके बाद ही वह बच्चे को एडॉप्ट कर सकता है।

इनका कहना है

बच्चे को एडॉप्ट करने करीब 30 लोगों ने संपर्क कर जानकारी ली। सभी को इसकी प्रक्रिया बता दी गई कि यह अस्पताल के पास अधिकार नहीं है। यहां से एक पत्र एसडीएम को लिखा जा रहा है। इसके बाद बच्चा मातृ छाया भेजा जाएगा। बच्चा पूरी तरह स्वस्थ है।

- डॉ. संजय मिश्रा पैथोलॉजिस्ट, एल्गिन महिला अस्पताल

बच्चे को गोद लेने या एडॉप्ट करने की ऑनलाइन प्रक्रिया है। अभी एक साल की प्रतीक्षा सूची है। जिसके पास भी बच्चा जाएगा उसकी वित्तीय स्थिति, एजुकेशन व अन्य जानकारियां ली जाती हैं। इसके बाद सेंट्रल एडॉप्शन रिसोर्स एजेंसी के द्वारा ही बच्चे को गोद देने की प्रक्रिया पूरी की जाती है।

- अतीत तिवारी संचालक, प्रमुख मातृछाया सेवाभारती

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