अंगदान से मिल जाएगी जरूरतमंद को जिंदगी, शास्त्रों में भी इसका जिक्रUpdated: Sat, 12 Aug 2017 01:33 AM (IST)

अंगदान से मौत के मुंह में जा रहे मरीज को नई जिंदगी मिल सकती है। शास्त्रों में भी इसका जिक्र है।

जबलपुर, नईदुनिया प्रतिनिधि। अंगदान से मौत के मुंह में जा रहे मरीज को नई जिंदगी मिल सकती है। शास्त्रों में भी इसका जिक्र है। ऋषि दधीचि ने असुरों से देवताओं की रक्षा करने के लिए अपने शरीर की सभी हड्डियों का दान कर दिया था। जबलपुर में केदार प्रसाद द्विवेदी के अंगदान के बाद अब संतों का भी कहना है कि शहर के ज्यादा से ज्यादा लोगों को इससे प्रेरणा लेनी चाहिए।

अस्पताल संचालक भी अंगदान को बढ़ावा देने के लिए लोगों में जागरुकता के लिए प्रयास करने योजना बना रहे हैं। लेकिन कहीं न कहीं लोगों में भ्रांतियां हैं। लोग इसे धर्म से जोड़कर देखते हैं। नईदुनिया ने अंगदान को लेकर संतों से भी बात की। इसमें संतों ने भी ब्रेनडेड केस में अंगदान को बढ़ावा देने की बात कही।

ये कहना है संतों का

अंगदान की सनातन परंपरा रही है। महर्षि दधीचि ने भी अंगदान किया था। इसी परंपरा का निर्वाह हम सभी को करना चाहिए। पुराणों में भी इसका जिक्र है। पुराणों में रक्तदान का भी जिक्र है। हमें इसका पालन करना चाहिए। इससे जरूरतमंद को जीवन मिल सकता है। हम पुराणों पर विश्वास करते हैं और पुराणों में अंगदान के बारे में लिखा है। इससे प्रेरणा लेकर हमें इस परंपरा का निर्वाह करना चाहिए। अंगदान में किसी तरह का दोष नहीं है।- स्वामी अखिलेश्वरानंद महाराज

अंगदान हमारी परंपरा रही है। ग्रंथों में इसके बारे में लिखा गया है। इसका बकायदा प्रमाण है। हमें इसका पालन करना चाहिए। यह समाज के लिए हितकर होगा। सिंगापुर में अंगदान के लिए कानून है जिसके अनुसार जो अंगदान करना है उसके परिवार में यदि किसी को अंग की जरूरत पड़ती है तो उसे यह सुविधा दी जाती है। ब्रेनडेड केस में अंगदान आज समाज की जरूरत है। भ्रांतियां दूर करके अंगदान के लिए आगे बढ़ना चाहिए। - स्वामी गिरीशानंद महाराज

अपने अंगों का दान करने से ज्यादा पुण्य का कार्य कुछ भी नहीं है। शरीर नष्ट हो जाने के बाद यदि कोई अंग किसी के काम आ सकें तो उस मरते हुए व्यक्ति को दीर्घ जीवन मिल जाता है। यह केवल भ्रांति है कि जिस अंग का दान किया जाए तो अगले जीवन में उसे वह अंग नहीं मिलता। यह गलत धारणा है। अंगदान से बढ़कर कुछ नहीं है। अंगदान महादान कहलाता है। इसमें अंधविश्वास नहीं लाना चाहिए। - स्वामी श्यामदास सरस्वती महाराज

आधुनिक युग में अंगदान जरूरत है। मरणोपरांत शरीर को दफन कर दिया जाता है या जला दिया जाता है। केवल आत्मा जीवन है, शरीर मिट्टी में मिल जाता है। लोगों को अंगदान करना चाहिए। इससे जरूरतमंद को नया जीवन मिल सकता है। इसे धर्म से नहीं जोड़ना चाहिए बल्कि यह देखना चाहिए कि इससे कितनी जिंदगी बच सकती हैं। किसी की जिंदगी बचाना सबसे बड़ा धर्म है। इसलिए यदि यह मौका मिलता है तो परिजन को बिना किसी अंधविश्वास के ब्रेनडेड केस में अंगदान करवाना चाहिए। - बिशप पीसी सिंग

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