80 छात्रों का एमडीएस में प्रवेश कैसे हुआ, बताएं निजी कॉलेजUpdated: Wed, 06 Sep 2017 09:04 PM (IST)

निजी डेंटल कॉलेजों में पिछले साल एमडीएस में करीब 80 सीटों पर छात्रों के प्रवेश संदिग्ध हो गया है।

जबलपुर। निजी डेंटल कॉलेजों में पिछले साल एमडीएस में करीब 80 सीटों पर छात्रों के प्रवेश संदिग्ध हो गया है। इन सीटों पर उन छात्रों को प्रवेश दिया गया जिन्होंने इसके लिए राष्ट्रीय स्तर पर आयोजित प्री-पीजी परीक्षा या तो दी नहीं, या इसमें क्वालिफाईंग मार्कस नहीं लाए। इन छात्रों के पास अलॉटमेंट लेटर ही नहीं है।

भोपाल में बुधवार को हाईपावर कमेटी की बैठक में जब निजी कॉलेज संचालकों को बुलाया गया तो केवल भोपाल के निजी डेंटल कॉलेज के संचालक बैठक में पहुंचे। कमेटी ने सभी निजी कॉलेज संचालकों को 23 सितम्बर तक शपथ पत्र में इन छात्रों के प्रवेश के बारे में जानकारी देने कहा है।

ये है मामला

प्रदेश के डेंटल कॉलेजों में एमडीएस की 120 सीटें हैं। इनमें से करीब 80 छात्रों ने प्रवेश तो ले लिया लेकिन इनके पास किसी तरह का अलाटमेंट लेटर नहीं है। मेडिकल यूनिवर्सिटी में जब इन छात्रों को एनरोलमेंट के लिए प्रक्रिया की गई तब मामला सामने आया। मेडिकल यूनिवर्सिटी ने इसके लिए हाईपावर कमेटी बनाई है हालांकि निजी डेंटल कॉलेज के संचालकों का कहना है कि हाई पावर कमेटी बनाने का अधिकार मेडिकल यूनिवर्सिटी को नहीं है।

बैठक में नहीं पहुंचे संचालक

हाईपावर कमेटी की बैठक भोपाल में बुधवार को हुई। बैठक में केवल रिशीराज डेंटल कॉलेज, भोपाल के संचालक पहुंचे। इसके अलाव अन्य निजी डेंटल कॉलेजों के संचालक बैठक में नहीं पहंुचे। कमेटी ने सभी संचालकों को पत्र जारी कर कहा है कि वे शपथ पत्र देकर यह बताएं कि इन छात्रों को किस आधार पर कॉलेजों में प्रवेश दिया गया। इस संबंध में सभी प्रमाण पत्र भी पेश करें।

डीसीआई को भेजेंगे अनुशंसा

निजी डेंटल कॉलेजों के करीब 80 छात्रों का प्रकरण सामने आया है। इनमें से कुछ छात्र ऐसे हैं जिन्होंने एमडीएस की प्रवेश परीक्षा के लिए आयोजित होने वाली राष्ट्रीय स्तर की परीक्षा को क्वालीफाई नहीं किया, या कुछ ऐसे भी हैं जो इस परीक्षा में बैठे ही नहीं। इसकी जांच हो रही है। इसके लिए हाईपावर कमेटी ने निजी डेंटल कॉलेज संचालकों को पत्र भेजा है कि वे 23 सितम्बर तक शपथ पत्र देकर बताएं कि इन छात्रों को किस आधार पर प्रवेश दिया गया। इसमें वे इनके प्रमाण पत्र भी भेजें। इसकी सूचना डीसीआई (डेंटल कौंसिल ऑफ इंडिया) को दी जाएगी। डॉ. आरएस शर्मा कुलपति, मेडिकल यूनिवर्सिटी

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