निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज में दाखिले के लिए मूल निवासी होना जरूरीUpdated: Mon, 26 Sep 2016 09:02 PM (IST)

राज्य के निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजेस में दाखिले के लिए मूलनिवासी होना आवश्यक है।

जबलपुर। मध्यप्रदेश हाईकोर्ट ने सोमवार को अपने एक महत्वपूर्ण फैसले के जरिए निर्धारित कर दिया कि राज्य के निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजेस में दाखिले के लिए मूलनिवासी होना आवश्यक है। यह व्यवस्था प्राइवेट मेडिकल एंड डेंटल एडमिशन रूल्स के रूल-6 को असंवैधानिक करार देते हुए दी गई है। इस नियम के तहत भारत का नागरिक होने की शर्त तय की गई थी। जिसका लाभ उठाकर मध्यप्रदेश के बाहर के स्टूडेंट यहां के निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज में प्रवेश हासिल कर लेते थे। लेकिन हाईकोर्ट के ताजा आदेश के बाद अब महज मध्यप्रदेश के मूलनिवासियों को ही प्राइवेट मेडिकल-डेंटल कॉलेज में दाखिला मिल सकेगा।

न्यायमूर्ति आरएस झा व जस्टिस सीवी सिरपुरकर की युगलपीठ के समक्ष मामले की सुनवाई हुई। इस दौरान याचिकाकर्ता ग्वालियर निवासी अभिनव दुबे की ओर से अधिवक्ता आदित्य संघी ने पक्ष रखा। उन्होंने दलील दी कि देश के 29 राज्यों में से 5 राज्यों में निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज नहीं हैं। मध्यप्रदेश को छोड़कर शेष सभी राज्यों में निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए मूलनिवासी होने का प्रावधान रखा गया है। केवल मध्यप्रदेश ऐसा राज्य है, जहां मनमाने तरीके से भारत का नागरिक होने का अनुचित नियम लागू कर दिया गया।

राज्य के शासकीय अस्पतालों में पहले ही डॉक्टर्स की कमी है, इसके बावजूद दूसरे राज्यों के छात्र-छात्राओं को मौका देना समस्या को और बढ़ावा देने वाली स्थिति है। ऐसा इसलिए भी क्योंकि बाहरी राज्यों के छात्र एमबीबीएस व बीडीएस की पढ़ाई तो मध्यप्रदेश में करेंगे लेकिन वे सेवा देने अपने-अपने राज्यों की तरफ लौट जाएंगे।

बाहर के राज्यों के छात्रों को करोड़ों में बेच देते हैं सीट

बहस के दौरान आरोप लगाया गया कि 29 एवं 30 सितम्बर के दरमियान निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेज अपनी सीटें 75 लाख से लेकर 1 करोड़ तक में राज्य के बाहर के छात्र-छात्राओं को बेच देते हैं। इसी आशंका के मद्देनजर मध्यप्रदेश के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के हक में हाईकोर्ट की शरण ली गई।

सरकार के साथ मिलीभगत के जरिए बदला नियम

याचिकाकर्ता की ओर से आरोप लगाया गया कि निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों के संगठन व प्रबंधन की मिलीभगत से मूलनिवासी होने संबंधी नियम को चालाकी से बदलकर भारत का नागरिक होने का मनमाना नियम लाद दिया गया। इसके जरिए मध्यप्रदेश की प्रतिभाओं का हक मारकर बाहरी रसूखदारों के बच्चों को डॉक्टर बनाने की चाल चली गई।

राज्य शासन की ओर से संतोषजनक जवाब नहीं

सवाल उठता है कि जब मध्यप्रदेश के शासकीय मेडिकल कॉलेजों में दाखिले के लिए मूलनिवासी होने का नियम पहले से लागू है, तो निजी मेडिकल-डेंटल कॉलेजों के संदर्भ में नियम में आखिर बदलाव क्यों किया गया? इस सिलसिले में राज्य शासन की ओर से कोई संतोषजनक जवाब प्रस्तुत नहीं किया जा सका। हाईकोर्ट ने इस स्थिति को ध्यान में रखते हुए नियम-6 को असंवैधानिक करार दे दिया। इसी के साथ प्रदेश के प्रतिभाशाली छात्र-छात्राओं के लिए निजी कॉलेजों में मेडिकल-डेंटल कोर्स की पढ़ाई के लिए दाखिले का रास्ता साफ हो गया।

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