हर दिन त्योहार, मनाते वक्त खुश इसके बाद दुखीUpdated: Sun, 19 Mar 2017 11:54 PM (IST)

तीज-त्योहारों को मनाने में हम भारतीयों का सबसे ज्यादा समय बीतता है, इसके बाद भी दुनिया हमें खुशहाल, खुशमिजाज नहीं मानती।

जबलपुर, नईदुनिया रिपोर्टर। नए साल का जश्न, होली पर रंगों की बौछार, दिवाली की आतिशबाजी से लेकर सालभर अमूमन हर दिन पड़ने वाले तीज-त्योहारों को मनाने में हम भारतीयों का सबसे ज्यादा समय बीतता है। इन पर्वों की रौनक घर से लेकर सड़क तक दिखाई भी देती है। बावजूद इसके हमें दुनिया खुशहाल, खुशमिजाज नहीं मानती। वजह हमारे समाज में व्याप्त बेरोजगारी, गरीबी, असमानता और असुरक्षा की भावना है। जिसके चलते हम खुश होकर भी दुखी रह जाते हैं।

ये निष्कर्ष है यूनाइटेड नेशन की सब्स्टेनेबल डेवलपमेंट साल्यूशन नेटवर्क की रिपोर्ट का। इसके अनुसार खुशमिजाज जीवन जीने और खुशहाल रहने के मामले में दुनिया में हमारा स्थान 118 वां है। जबकि इस मामले में पाकिस्तान, बांग्लादेश, सोमालिया जैसे अविकसित देश हमसे कहीं आगे हैं। हालांकि हालात बदल रहे हैं। रोटी, कपड़ा और मकान की ओर सरकारी प्रयास जारी हैं। इसलिए उम्मीद भी बरकरार है कि आने वाले वक्त में हम सही मायने में खुशहाल हो पाएंगे। आज वर्ल्ड हैप्पीनेस डे पर हम अपने पाठकों को देश-प्रदेश में खुशहाली से जुड़ी रोचक बातें बता रहे हैं।

वो बातें जो हमें खुश कर देंगी

1. मप्र में देश का पहला खुशहाली विभाग

मप्र में देश का पहला खुशहाली विभाग सरकार द्वारा स्थापित कराया गया है। इसका उद्देश्य गरीब, असहाय लोगों की रोटी, कपड़ा की जरूरतों को पूरा करना है। इस विभाग की स्थापना भूटान जैसे छोटे देश से प्रेरणा लेकर की गई है।

2. मिल रहा रोजगार

स्टेट बैंक ऑफ इंडिया की इकोफ्लैश रिसर्च टीम द्वारा हाल ही में जारी सर्वे रिपोर्ट हमें उत्साहित भी करती है। अगस्त 2016 से फरवरी 2017 के बीच देश में बेरोजगारी की दर 9.5 प्रतिशत से घटकर 4.8 प्रतिशत तक आ गई है। उत्तरप्रदेश में बेरोजगारी 17.1 से घटकर 2.9 प्रतिशत रह गई। मप्र में ये दर 10 प्रतिशत से घटकर 2.7 प्रतिशत, झारखंड में 9.5 प्रतिशत से 3.1 प्रतिशत, उड़ीसा में 10.2 से 2.9 प्रतिशत व बिहार में 13 प्रतिशत से घटकर 3.7 प्रतिशत बेरोजगारी रह गई है। रिपोर्ट के अनुसार मनरेगा में इस अवधि में 50.5 लाख लोगों को रोजगार मिला।

वो बातें जो रोक रहीं खुश होने से

1. घट रही नींद, छिन रहा सुकून

दुनिया की तेजी से वृद्धि करती अर्थव्यवस्था वाले 18 देशों में हम भारतीय जापान के बाद सबसे कम सोते हैं। फिटनेस साल्यूशन फर्म फिटविट की रिपोर्ट के अनुसार भारत के लोग 24 घंटे में औसतन 6.55 घंटे ही नींद ले पाते हैं। इस मामले में हम सिर्फ जापान से आगे हैं, जहां के लोग 6.35 घंटे की नींद लेते हैं। सबसे अच्छी नींद लेने के मामले में न्यूजीलैंड, ब्रिटेन, आस्ट्रेलिया के लोग सबसे आगे हैं। जहां के लोग क्रमशः 7.25 घंटे, 7.16 घंटे व 7.15 घंटे की नींद लेते हैं। सर्वे के अनुसार पर्याप्त नींद न होने के कारण भारतीय तनावग्रस्त हो रहा है, इसका असर उसकी कार्यक्षमता व लाइफस्टाइल पर पड़ता है।

2. प्रोफेशल्स की घट रही डिमांड

ऑल इंडिया काउंसिल फॉर टेक्निकल एजुकेशन की रिपोर्ट के अनुसार देश में 60 फीसदी इंजीनियरिंग ग्रेजुएट्स बेरोजगार हैं। खासकर विनिर्माण के क्षेत्र में अवसर बेहद कम हो गए हैं। यही हाल मैनेजमेंट क्षेत्र में एमबीए जैसी डिग्रियों का भी है। इसका असर शहरी क्षेत्र के युवाओं व उनके परिवारों की खुशी पर पड़ रहा है।

3. पुरुष-महिला असमानता

महिलाएं पढ़ रहीं हैं, नौकरीपेशा भी हैं लेकिन समाज में अभी भी उन्हें खुद का जीवनसाथी चुनने की आजादी नहीं है। उनके प्रति अपराध भी पिछले कुछ सालों में बढ़े हैं। कंधे से कंधा मिलाकर काम करने के बावजूद महिलाओं का बराबरी का दर्जा प्राप्त नहीं है। ग्रामीण अंचलों में तो स्थिति और भी खराब है।

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