बाहरी मेडिकल छात्र बाहर हुए तो प्रदेश में 200 को फायदाUpdated: Fri, 25 Aug 2017 08:30 PM (IST)

ऐसे छात्र-छात्राएं, जिन्होंने मप्र का मूलनिवासी प्रमाण पत्र बनवाकर मप्र के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन लिया है, वे अब निराश हैं।

जबलपुर। बाहर के ऐसे छात्र-छात्राएं, जिन्होंने मप्र का मूलनिवासी प्रमाण पत्र बनवाकर मप्र के मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में एडमिशन लिया है, वे अब निराश हैं। अब उनकी जगह करीब 200 से अधिक ऐसे छात्रों को फायदा मिल सकेगा जोकि वास्तव में मप्र के मूल निवासी हैं। यह संभव हुआ हाईकोर्ट के एक आदेश के बाद। याचिकाकर्ता व्हिसल ब्लोअर विनायक परिहार अब आशान्वित हैं कि मप्र के छात्रों को न्याय मिलेगा।

अब तक ये हुआ

मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश के लिए पहले राउंड की काउंसिलिंग हो चुकी है। इसके आधार पर करीब 80 प्रतिशत से अधिक एडमिशन भी हो चुके हैं। लेकिन मप्र के बाहर उप्र, छग के निवासी कुछ उम्मीदवारों ने मप्र का भी मूल निवासी प्रमाण पत्र बनाकर एडमिशन ले लिया। इस मामले में कोर्ट में व्हिसल ब्लोअर विनायक परिहार ने याचिका दायर की थी। इसके आधार पर कोर्ट ने दूसरी राउंड की काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है।

कुल इतनी हैं सीटें

सरकारी कॉलेजों में एमबीबीएस की सीटें - 850

सरकारी कॉलेजों में बीडीएस की सीटें - 40

प्राइवेट कॉलेज में एमबीबीएस की सीटें - 900

प्राइवेट कॉलेजों में बीडीएस की सीटें - 1320

ये होता है

काउंसिलिंग में सभी डाक्यूमेंट के साथ फीस का चेक जमा करना होता है। यदि पहले राउंड की काउंसिलिंग में मनपसंद कॉलेज नहीं मिलता तो सेकंड राउंड की काउंसिलिंग में यदि सीट वेकेंट रहती है तो गुंजाइश रहती है लेकिन फीस पहले ही जमा हो जाती है। सीट खाली होने पर कई बार छात्रों को प्राइवेट से सरकारी कॉलेज भी मिल जाता है। वहीं प्राय: बीडीएस सेकण्ड च्वाइस रहती है लेकिन सीट वेकेंट होने पर बीडीएस के छात्र प्रमोट होकर एमबीबीएस में भी चले जाते हैं।

जिनके एडमिशन हो गए उनका क्या

कोर्ट के आदेश के बाद संभव है कि शासन सुप्रीम कोर्ट जाए। अभी जिनके एडमिशन हो चुके हैं उनके लिए क्या करना है यह डीएमई ने क्लीयर नहीं किया है। इसकी रिपोर्ट भी नहीं दी है।

इनका कहना है

दोहरे मूलनिवासी प्रमाण पत्र बनाकर मप्र के मेडीकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश लेने का फर्जीवाड़ा चल रहा था। कोर्ट के आदेश के बाद इस पर लगाम लगी है। अब मप्र के वास्तविक मूलनिवासी छात्रों को फायदा मिलेगा। मैंने सुप्रीम कोर्ट में पहले ही केविएट लगा दी है।

आदित्य संघी सीनियर एडवोकेट

बाहर के छात्रों को मेडिकल और डेंटल कॉलेजों में प्रवेश दिया जा रहा था। इसे लेकर मैंने याचिका लगाई थी। इससे हाईकोर्ट ने सेकण्ड काउंसिलिंग पर रोक लगा दी है और डीएमई को पूरा डिटेल पेश करने कहा है। इससे मप्र के निवासी छात्र-छात्राओं को हक मिला है इससे 200 से अधिक छात्रों को फायदा मिलेगा।

विनायक परिहार व्हिसल ब्लोअर, याचिकाकर्ता

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