बेहतर सेहत के लिए दूध को जरिया बना रहे शहर के युवाUpdated: Thu, 01 Jun 2017 01:36 PM (IST)

दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए किस तरह कैमिकल व अन्य तरीकों को अपनाया जा रहा है।

इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। एक बार मैं पापा के साथ एक डेरी फार्म देखने गई। वहां देखा कि दूध की मात्रा बढ़ाने के लिए किस तरह कैमिकल व अन्य तरीकों को अपनाया जा रहा है। इस कैमिकल से दूध में ए 2 प्रोटीन की बजाए ए 1 प्रोटीन शामिल हो जाता है, जो सेहत के लिए सही नहीं है। यह सच जानने के बाद मैंने तय किया कि मैं अब दूध नहीं पीउंगी। तब पिता ने समझाया कि आंखें बंद कर लेने से बुराई कम नहीं हो सकती। जरूरत है तो इस समस्या का निराकरण करने की। उसके बाद मैंने इस बारे में सोचना और स्टडी करना शुरू किया। निर्णय लिया कि औरों को भी बेहतर दूध मुहैया करवाया जाए।

लोगों को बेहतर दूध मुहैया कराने की कोशिश केवल पूजा ही नहीं कर रही बल्कि शहर के एक और युवा हेमेंद्र सिंह जादौन भी कर रहे हैं। यह तो सभी जानते हैं कि दूध में वे सभी पोषक तत्व होते हैं जिनकी आवश्यकता शरीर और मस्तिष्क के विकास के लिए होती है, लेकिन किसके लिए कितनी मात्रा में और किस तरह का दूध आवश्यक है इसकी जानकारी होना भी जरूरी है।

प्राकृतिक पोषक तत्व ही हों दूध में

पूजा जैन बताती हैं कि जब स्टडी में उन्होंने यह पाया कि गिर नस्ल की गाय के दूध में ही ए 2 प्रोटीन होता है, जो कि शरीर के लिए बहुत लाभदायक है तो इस ओर ध्यान देना शुरू किया। बुरहानपुर में काठियावाड़ी गौपालकों के साथ मिलकर गिर नस्ल की गायों का डेरी फॉर्म शुरू किया और आज 200 गाय फार्म में शामिल हो चुकी हैं। प्राकृतिक ढंग से इन गायों का ख्याल रखा जाता है ताकि इनसे मिलने वाला दूध भी प्राकृतिक गुणों वाला ही हो जो शरीर को फायदा पहुंचाए।

जिन्हें ज्यादा जरूरत उन्हें ही करा रहे मुहैया

हेमेंद्र सिंह जादौन बताते हैं कि जब उन्हें इस बात का पता चला कि गिर नस्ल की गाय के दूध में ज्यादा पोषक तत्व होते हैं तो उन्होंने भी अपने फार्म हाऊस पर गाय पालना शुरू कर दिया। श्री जादौन बताते हैं कि नईदुनिया में गिर नस्ल की गाय और दूध पर प्रकाशित अन्य आलेखों से प्रभावित होकर उन्होंने इस विषय पर गंभीरता से विचार किया। परिवार सेहतमंद रहे इसलिए खुद ही गाय पाल लीं। अभी गायों की संख्या बहुत ज्यादा नहीं है, इसलिए कोशिश यही रहती है कि इनका दूध उन्हें ही मुहैया करवाया जाए जो शारीरिक अस्वस्थता के कारण अन्य गाय या भैंस का दूध पचा नहीं पाते।

इसलिए है बेहतर यह दूध

इंटरनेशनल कार्डियोलॉजी के अध्यक्ष डॉ. शांतिलाल शाह के अनुसार भैंस के दूध में लांगचेन फैट होता है जो नसों में जम जाता है। इसके फलस्वरूप हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है। इसलिए हृदय रोगियों के लिए गाय का दूध ही सर्वोत्तम है। भारतीय गाय के दूध में विटामिन बी 12 अधिक पाया जाता है जो सेहत के लिए तो बेहतर है ही साथ ही इससे खून की कमी भी नहीं होती।

जरूरी है 300 एमल दूध पीना

- खाने में जो आवश्यक तत्व शामिल हैं, उनमें से दूध और दूध से बने पदार्थ भी बेहद महत्वपूर्ण हैं।

- शाकाहार में प्रोटीन के जैविक मूल्य कम होते हैं, जबकि दूध का जैविक मूल्य 95 प्रतिशत होता है।

- दूध में अमिनो अम्ल पूरे 10, विटामिन बी 12 और फॉलिक एसिड जैसे अनेक तत्व होते हैं जो शरीर व मस्तिष्क के विकास के लिए बहुत जरूरी है।

- किशोरावस्था तक के बच्चे, गर्भावस्था, रोगी और खिलाड़ियों को एक दिन में करीब आधा लीटर दूध पीना चाहिए।

- सामान्य व्यक्ति को प्रतिदिन करीब 3 सौ एमएल दूध पीना चाहिए।

- भैंस का दूध सामान्य व्यक्ति पी सकता है जबकि बीमार, बच्चे और कमजोर व्यक्ति को देसी नस्ल की गाय का दूध ही पीना चाहिए।

डॉ. मुनीरा हुसैन, आहार एवं पोषक विशेषज्ञ

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.