पौधों में भी होता है स्ट्रेस, इंदौर की प्रोफेसर को मिला अंतर्राष्ट्रीय सम्मानUpdated: Wed, 15 Nov 2017 10:52 AM (IST)

मनुष्य में होने वाले स्ट्रेस से तो सभी परिचित हैं, लेकिन पौधों में होने वाले स्ट्रेस से शायद कम ही लोग परिचित होंगे।

इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। अधिकांश लोग स्ट्रेस को लेकर परेशान रहते हैं। मनुष्य में होने वाले स्ट्रेस से तो सभी परिचित हैं, लेकिन पौधों में होने वाले स्ट्रेस से शायद कम ही लोग परिचित होंगे। वैज्ञानिकों का मानना है कि जिस तरह से हम तनाव में रहते हैं, उसी तरह पौधों में भी तनाव होता है। वैज्ञानिकों के मुताबिक जितनी जल्दी इसका पता चल जाए यह पौधे की वृद्धि और स्वास्थ्य के लिए बेहतर होता है।

देवी अहिल्या यूनिवर्सिटी की प्रोफेसर डॉ. अंजना जाजू को हाल ही में प्लांट स्ट्रेस पर शोध के लिए अंतर्राष्ट्रीय स्तर पर सम्मानित किया गया है। 'प्रकाश संश्लेषण' विषय पर हैदराबाद यूनिवर्सिटी में आयोजित अंतर्राष्ट्रीय सम्मेलन में 30 देशों के 200 से अधिक वैज्ञानिकों ने भाग लिया। सम्मेलन की अंतर्राष्ट्रीय कमेटी ने तीन भारतीय वैज्ञानिकों को उनके उत्कृष्ट शोधकार्य के लिए सम्मानित किया। डीएवीवी की लाइफ साइंस विभाग की प्रोफेसर डॉ. अंजना जाजू इनमें से एक हैं।

बदलता मौसम और प्रदूषण बड़ा कारण

नईदुनिया से बातचीत में डॉ. जाजू ने बताया कि बदलते मौसम, बढ़ते तापमान और पानी की कमी के कारण पौधों में तनाव होता है। इसके अलावा तनाव बढ़ाने के लिए उद्योगों से निकलने वाला भारी मेटल प्रदूषण और पर्यावरणीय प्रदूषण, जिसमें गाड़ियों के धुएं से निकलने वाली गैसें प्रमुख कारण हैं।

फ्लोरोमीटर से जानिए प्लांट स्ट्रेस

प्लांट स्ट्रेस का लेवल मापने के लिए फ्लोरोमीटर का उपयोग किया जाता है। पौधों के स्ट्रेस का असर उनके फोटोसिंथेसिस पर होता है। यदि पौधों में यह 20 से 30 फीसदी कम हो जाए तो इसका मतलब है वे तनाव में हैं। कभी-कभी यह 80 फीसदी तक कम हो जाता है।

यूरोपियन यूनियन से भी मिला सम्मान

प्लांट स्ट्रेस पर रिसर्च के लिए जून 2017 में डॉ. जाजू को यूरोपियन यूनियन द्वारा 'इरेमस मुंडस एकेडेमिक अवॉर्ड" के लिए चुना गया था, जिसके तहत उन्हें पोलैंड के कई विश्वविद्यालयों में अपने शोधकार्य से संबंधित व्याख्यान देने के लिए बुलाया था।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.