अपने ही दे रहे धोखा, किसी के बच्चे तो किसी के दोस्त ने गायब किए रुपएUpdated: Tue, 12 Sep 2017 03:58 AM (IST)

साइबर सेल ने एक महीने में नए व पुराने ऐसे केसों से पर्दा उठाया है, जिसे सुनकर पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई।

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। साइबर सेल ने एक महीने में नए व पुराने ऐसे केसों से पर्दा उठाया है, जिसे सुनकर पीड़ितों के पैरों तले जमीन खिसक गई। 12 शिकायतकर्ताओं ने खातों से ऑनलाइन ठगी की शिकायत की थी। जांच में पता चला कि आरोपी कोई बदमाश नहीं, बल्कि परिवार के ही बच्चे हैं या फिर दोस्त।

जब यह बात उजागर हुई तो आरोपियों ने माफी मांगी। परिजन और दोस्तों ने अपना समझकर उन्हें माफ तो कर दिया, लेकिन पुलिस ने हिदायत दी कि यदि वह इस तरह की हरकत दोबारा करेंगे तो साइबर अपराधी की श्रेणी में आएंगे। केस दर्ज किया जाएगा और जेल की हवा भी खाना होगी।

साइबर सेल एसपी जितेंद्र सिंह के मुताबिक, ऑनलाइन ठगी के केसों में पता चला कि फरियादी के पेटीएम वॉलेट अपने ही लोगों के नाम व मोबाइल नंबर से रजिस्टर्ड थे। जिनका विश्वास कर उन्होंने वॉलेट पर नाम व मोबाइल नंबर रजिस्टर्ड कराया, उन्होंने ही धोखा दे दिया। एसपी ने अपील की है कि डेबिट व के्रडिट कार्डधारक जिस तरह से नकद रुपए संभालकर रखते हैं, उसी तरह अपने कार्ड को संभालकर रखें, ताकि उनका दुरुपयोग ना हो।

अपने मोबाइल फोन, लैपटॉप और पीसी पर स्क्रीन लॉक कर रखें, जिससे फाइनेंशियल ट्रांजैक्शन पर प्राप्त होने वाले ओटीपी का दुरुपयोग ना हो। एसपी ने बताया कि एक माह में 12 तरह के ऐसे केस आए हैं, जिनमें अपनों ने ही धोखाधड़ी की है। इनमें से कुछ केस इस तरह हैं।

- 6 फरवरी को सिलीकॉन सिटी निवासी आवेदक राजेश (परिवर्तित नाम) ने शिकायत की थी कि एचडीएफसी बैंक से पेटीएम के माध्यम से 10 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लिए गए। पेटीएम से जानकारी लेने पर पता चला कि रुपए आवेदक के खाते से पेटीएम वॉलेट (जो कि आवेदक के दोस्त के मोबाइल नंबर और नाम पर रजिस्टर्ड था) में ट्रांसफर हुए। पेटीएम से 10 हजार रुपए आवेदक के दोस्त संजय के ही एकाउंट में ट्रांसफर हुए थे। संजय से पूछताछ करने पर पता चला कि राजेश को रुपए उधार रुपए दिए थे। रुपए वापस नहीं करने पर आरोपी संजय ने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लिया।

- शिवशक्ति नगर निवासी सरला (परिवर्तित नाम) अधिकारी हैं। 31 मई को शिकायत की थी कि उनके एसबीआई के खाते से किसी ने 70 हजार रुपए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लिए। रुपए पेटीएम वॉलेट में ट्रांसफर हुए थे। यह पेटीएम वॉलेट महिला के भतीजे के मोबाइल नंबर व नाम पर रजिस्टर्ड था। जांच में पता चला कि भतीजे राजकुमार (परिवर्तित नाम) ने अपने शौक पूरे करने के लिए दोस्त के खाते में रुपए ट्रांसफर कर दिए थे।

- 3 अगस्त को शीतल नगर निवासी प्रकाश (परिवर्तित नाम) के एचडीएफसी बैंक के खाते से किसी बदमाश ने 14 हजार 900 रुपए ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लिए। जांच में पता चला कि पेटीएम वॉलेट प्रकाश के दोस्त श्रवण के नाम व मोबाइल नंबर पर रजिस्टर्ड था। श्रवण को रुपयों की जरूरत थी। उसने ऑनलाइन ट्रांजैक्शन कर लिए।

- स्कीम 51 में रहने वाले व्यापारी सुरेश (परिवर्तित नाम) ने 31 दिसंबर 2016 को ऑनलाइन ठगी की शिकायत की थी कि बैंक ऑफ इंडिया के खाते से 21 हजार रुपए का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हुआ। जांच में पता चला कि नाबालिग बेटी के मोबाइल नंबर व नाम पर पेटीएम वॉलेट रजिस्टर्ड था। उसने ही यह वारदात की। वह दसवीं की छात्रा है। उसने अलग-अलग जगह से ऑनलाइन शॉपिंग की थी।

- 7 अक्टूबर को पीथमपुर निवासी जुगल किशोर (परिवर्तित नाम) के एसबीआई के खाते से मोबीक्विक व फ्रीचार्ज के माध्यम से 2 हजार 50 रुपए का ऑनलाइन ट्रांजैक्शन हो गया। जांच में पता चला कि मोबीक्विक वॉलेट जुगल किशोर के बेटे के नाम पर रजिस्टर्ड है। बेटे व उसके दोस्तों के मोबाइल नंबरों पर रिचार्ज हुआ था। बेटे ने बताया कि पिकनिक जाने के लिए पिता से रुपए मांगे थे। नहीं देने पर उसने यह हरकत की।

- 14 दिसंबर 2016 को स्वर्णबाग कॉलोनी के राजेंद्र (परिवर्तित नाम) ने ऑनलाइन ठगी की शिकायत की थी कि किसी ने अमेजॉन के माध्यम से 2 हजार 860 रुपए की ऑनलाइन खरीदी कर ली। जांच में पता चला कि राजेंद्र के दोस्त दीपक का नाम व मोबाइल नंबर अमेजॉन वॉलेट में रजिस्टर्ड था। उसने नशे में रुपयों की मांग की थी। रुपए नहीं देने पर अमेजॉन से उसने कपड़े व घड़ी खरीद ली।

- 29 जून को रेसीडेंसी कोठी में रहने वाली देविका ने 48 हजार 300 रुपए एसबीआई के खाते से पेटीएम के माध्यम से ट्रांसफर होने की शिकायत की थी। जांच में पता चला कि देविका की बेटी व नातिन के मोबाइल नंबर व नाम पर पेटीएम वॉलेट रजिस्टर्ड था। दोनों ने ही अपने खाते में रुपए ट्रांसफर कर लिए थे।

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.