फिजियोथेरेपी डे : 60 फीसदी लोग कंधे, गर्दन के दर्द से ग्रस्तUpdated: Fri, 08 Sep 2017 10:37 AM (IST)

फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। बदलती लाइफस्टाइल और काम की व्यस्तता के चलते लोगों के पास व्यायाम करने के लिए समय नहीं है और इसके चलते उनमें गर्दन में दर्द, कंधे में दर्द, स्लिप डिस्क, स्पोंडिलाइटिस, पीठ व घुटनों का दर्द जैसी समस्याएं देखने को मिल रही हैं। शहर के कुछ फिजियोथेरेपिस्ट के अनुसार पिछले कुछ सालों में इस तरह के मामले लगातार बढ़ रहे हैं।

आंकड़ों के अनुसार शहर में 60 से 70 फीसदी लोग किसी न किसी रूप में इस तरह की समस्याओं से जूझ रहे हैं। 8 सितंबर विश्व फिजियोथेरेपी डे के रूप में मनाया जाता है और इस बार की थीम फिजिकल एक्टीविटी फॉर लाइफ है।

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. पायल हरगांवकर के अनुसार पहले जहां लोग फिजियोथेरेपी से बिल्कुल अनजान थे। आज शहर में लोग इसकी जरूरत के प्रति जागरूक हो रहे हैं। किन्तु आज भी लोग यह सोचते हैं कि यह सिर्फ एक्सरसाइज ही है। जरूरत के हिसाब से इसमें मशीनों का उपयोग भी होता है।

यह न्यूरो, कार्डियक, पीडिट्रिक सब तरह के मामले में उपयोगी है। हरगांवकर के अनुसार पेरालिसिस के मरीजों की फिजियोथेरेपी द्वारा 100 प्रतिशत रिकवरी हो जाती है। इसका सबसे बड़ा फायदा यह है कि ऑपरेशन के बाद भी मरीज दो-तीन दिन के अंदर चलने फिरने लगता है और अपने दैनिक जरूरत के काम करने लगता है।

डॉ. विवेक जैन के अनुसार आप अपने व्यस्त दैनिक जीवन में भी कुछ छोटी बातों का ख्याल रखें तो इस तरह की समस्याओं से दूर रह सकते हैं। जैसे सुबह पलंग से उठते समय कमर की एक्सटेंशन एक्सरसाइज, पेपर पढ़ते समय घुटने की एक्सरसाइज और ब्रीदिंग एक्सरसाइज कर सकते हैं।

गाइडेंस जरूरी

फिजियोथेरेपिस्ट डॉ. ऋचा उदिवाल के अनुसार आजकल लोग एक्सरसाइज के नाम पर जिम या घर में ही तरह-तरह की एक्सरसाइज करने का प्रयास करते हैं, किंतु इसके साइड इपुेक्ट्स भी हो सकते हैं, इसलिए किसी भी तरह की एक्सरसाइज शुरू करने के पहले फिजियोथेरेपिस्ट से राय लेना जरूरी है।

इन बातों का रखें ध्यान

-सोफे पर, कार में या ऑफिस में बैठते समय सही तरीका अपनाएं।

- अपनी ऊंचाई के हिसाब से सही कुर्सी का चयन करें

-कार्य करते समय कंप्यूटर की दूरी सही हो।

-कभी भी लेटकर या ज्यादा झुककर पढ़ाई न करें।

- लगातार बैठकर काम न करें। एक-दो घंटे में थोड़ा चलते रहिए।

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