हाथ नहीं, पैरों से कार चलाकर बोले- सामान्‍य लाइसेंस दोUpdated: Sun, 02 Aug 2015 04:00 AM (IST)

एक हादसे के दौरान दोनों हाथ खो चुके विक्रम अग्निहोत्री ने परिवहन विभाग की कमेटी के सामने कार चलाकर दिखाई।

इंदौर(मध्‍यप्रदेश)। बचपन में हुए हादसे के दौरान दोनों हाथ खो चुके युवक विक्रम अग्निहोत्री ने परिवहन विभाग की कमेटी के सामने शनिवार दोपहर कार चलाकर दिखाई। आईटीआई स्थित जिस ट्रैक पर कमर्शियल लाइसेंस के लिए ट्रायल होते हैं, उसी पर युवक ने 12-12 मिनट के दो ट्रायल देकर लाइसेंस के लिए अपना दावा पेश किया। कमेटी कुछ ही दिनों में अपनी रिपोर्ट पेश करेगी।

विजय नगर निवासी विक्रम ने 15 मई को कार खरीदी थी। इसके बाद उन्होंने जून माह में विजय नगर आरटीओ में लाइसेंस के लिए आवेदन दिया, तब विक्रम ने उपपरिवहन आयुक्त संजय सोनी और आरटीओ एमपी सिंह के सामने कार चलाकर दिखाई। इसके बाद मामले को परिवहन आयुक्त के पास भेजा गया। संजय सोनी ने बताया कि परिवहन आयुक्त ने हमें निर्देश दिए कि एक कमेटी बनाकर दोबारा विक्रम का ट्रायल लिया जाए।

हमने एक कमेटी जिसमें सिविल सर्जन, आरटीओ, परिवहन निरीक्षक, आईटीआई संयोजक और वहां के दो इंस्ट्रक्टर की एक कमेटी बनाई, जिसके सामने विक्रम ने कार चलाकर दिखाई। सिविल सर्जन ने शुक्रवार को विक्रम को दोबारा बुलाया है। वहां मेडिकल बोर्ड के सामने टेस्ट होगा। कमेटी अपनी रिपोर्ट परिवहन आयुक्त को भेजेगी।

विक्रम के पिता रिटायर्ड आईजी वीके अग्निहोत्री ने बताया कि विक्रम की गाड़ी में मामूली मॉडिफिकेशन कराया गया है। उसे सामान्य लाइसेंस मिलना चाहिए। चूंकि इस संबंध में कोई नियम नहीं है, इसलिए हमें विभाग इन्वैलिड कैटगरी में लाइसेंस दे। विक्रम अपने दोनों हाथ नहीं होने के बावजूद भी अपने सारे काम खुद करता है।

देश का पहला मामला!

आरटीओ अधिकारियों ने बताया कि अगर विक्रम का लाइसेंस बन गया तो यह प्रदेश का पहला लाइसेंस होगा। अब तक ऐसे लोगों को इन्वैलिड कैरिज कैटेगरी में लाइसेंस दिया जाता है, लेकिन ये वे लोग होते हैं, जिनके पैर नहीं होते और वे अपने हाथों से दो पहिया वाहन चला लेते हैं, लेकिन विक्रम का केस उलटा है। उसके हाथ नहीं हैं। वह पैरों से कार चलाता है। लाइसेंस बनने पर वह प्रदेश के साथ देश का भी पहला लाइसेंस होगा। हालांकि विदेश में ऐसे लोगों को लाइसेंस दिए गए हैं।

ऐसे साहसी लोगों का उत्साहवर्धन करना चाहिए

विक्रम चाहे तो ड्राइवर रखकर सफर कर सकता है, लेकिन उसने पैरों से कार चलाकर साहस का परिचय दिया, अगर कमेटी की रिपोर्ट सकारात्मक रही तो उसे इन्वैलिड कैरिज में लाइसेंस दिया जाएगा। हमें ऐसे साहसी लोगों का उत्साहवर्धन करना चाहिए। -डॉ. शैलेंद्र श्रीवास्तव, परिवहन आयुक्त

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