'जाने कहां ओझल हो गई हो'Updated: Mon, 11 Apr 2016 12:11 PM (IST)

यदि अब भी गौरैया को संरक्षण नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में ये पक्षी केवल यादों में ही कैद हो जाएगा।

इंदौर। घर-आंगन में फुदकती गौरैया को देख कितनों का बचपन बीता है, लेकिन बढ़ते प्रदूषण और बदलते पर्यावरण ने इसी गौरैया को पराया कर दिया। यदि अब भी गौरैया को संरक्षण नहीं दिया गया, तो आने वाले समय में ये पक्षी केवल यादों में ही कैद हो जाएगा। इस कड़वे सच को लोगों ने समझा और नईदुनिया की मुहिम 'लौट आओ गौरैया" के साथ में जुड़ रहे हैं और अन्य लोगों को भी जागरूक कर रहे हैं। गौरैया के प्रति इन्हीं संवेदनाओं को हम आप तक पहुंचा रहे हैं।

'गौरैया अब वापस लौट आओ"

तुम केवल कल्पना का विषय नहीं हो गौरैया

क्योंकि मैंने अपनी लंबी उम्र तक

अपनी जाग्रत आखों से तुम्हें निहारा है।

तुमसे शिक्षा ली है परिवार पालन की,

कैसे तुम कष्टमय समय में दूरदराज से अपनी चोंच में

दाना पानी का जुगाड़ करती हो?

मौसम की मार से बचाने के लिए अपने आशियाने को

तिनकों-तिनकों से कैसे संवारती हो?

तुम्हारी इस कला

को हममें से कइयों ने निहारा है।

पर विगत कई वर्षों से जाने कहां ओझल हो गई हो तुम?

तुम्हें खोजने के लिए मैं तुम्हारे जैसी उड़ान भी तो नहीं भर सकता हूं।

यदि प्रकृति से नाराज होकर तुम

कहीं दूर चली गई हो तो हम सभी मानव

पुन: उसे संवारने का उपक्रम तेजी से करेंगे

जिससे तुम पुन: हमारे नगर में आकर

पहले सी चहचहा सकोगी।

तुम्हारी मधुर आवाज को सुनने के लिए

मेरी प्रिय गौरैया अब वापस लौट आओ।

हर्षकुमार पाठक

537, एलआईजी 2

स्कीम नंबर 71

इंदौर

'तुम्हारी कमी हर जगह खल रही है"

भोर की सुनहरी किरणों सा है उसका तन

सूरज की लालिमा से मिलकर सजा देती है सुना गगन

कभी वृक्ष, लता, डाली-डाली पर रहती थी

क्या ये जहां क्या वो जहां सबको अपना वतन कहती थी

तुम्हारे आने से कभी आंगन खिल उठता था

तुम्हारी चहचहाट सुन मन का द्वार खुलता था

सुना है तुम हमसे यूं दूर होती जा रही हो

अपनों से बिछड़कर खुद को अकेला पा रही हो

आज तुम्हारे न होने से आंगन सूना पड़ा है

क्या कहें जब बच्चे पूछते हैं नन्ही गौरैया कहां है

कल तक दूसरों के किए की मिल रही तुम्हें सजाएं

आज तुझे खोजते फिर रहे हैं तेरा पता कहां है

हम से यूं रूठकर आज क्यों यूं बैठी हो

कुछ लोगों की सजा कइयों को क्यों देती हो

लौटकर आ जाओ आंखें तरस गई हैं

तुम्हारी कमी हर जगह खल रही है

शैली चौहान

कक्षा 10वीं

जेएनवी, धार

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