लौट आओ गौरैया : उसकी चहचहाहट का इंतजार हर दिन रहता हैUpdated: Tue, 29 Mar 2016 09:46 AM (IST)

धीरे-धीरे मेरा आंगन चिड़िया की चहचहाहट से गूंजने लगा। अब अनोखे मेहमान का इंतजार हर दिन रहता है।

इंदौर। पिछले साल इन्हीं दिनों की बात है। मेरे आंगन में मनी प्लांट की बेल पर एक नन्ही सी चिड़िया तिनका-तिनका जोड़कर न जाने कब एक सुंदर सा घोंसला बना गई। वह रोज आंगन में उड़ती और खुशी से फुदकती थी। धीरे-धीरे मेरा आंगन चिड़िया की चहचहाहट से गूंजने लगा। अब अनोखे मेहमान का इंतजार हर दिन रहता है। परस्पर नगर निवासी प्रो. भोलेश्वर दुबे ने सिटी लाइव के साथ यह अनुभव बांटे। वे 2004 से अपने आंगन में गौरैया के लिए दाना-पानी की व्यवस्था कर रहे हैं।

श्री दुबे ने बताया कि कुछ ही दिनों में मैंने देखा कि घोंसले में गौरैया के दो बच्चे झांक रहे हैं। चिड़िया आंगन-में फुदक-फुदककर उनके लिए खाना इकट्ठा करती और बच्चों को खिलाती। इनके बड़े होने का इंतजार गौरैया ही नहीं, मैं भी कर रहा था, लेकिन पता नहीं था कि पंखों में ताकत आते ही यह नन्हे पक्षी ऊंची उड़ान भरेंगे कि मेरे आंगन में लौटना ही नहीं होगा।

ऐसा हुआ भी। कई दिन मेरा मन दुखी रहा, लेकिन मैंने ढांढस बांधा, सबक भी लिया कि चिड़िया की तरह बच्चों का पालन-पोषण करो, तकलीफें सहो, लेकिन जब बच्चों के आसमान में उड़ने का समय आए, तो अपने प्रेम को उसके आगे बाधा न बनने दो। मैं अब भी हर दिन चिड़िया का इंतजार करता हूं। दाना-पानी भी रखता हूं।

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