बच्चे में कुछ भी असामान्य दिखे तो तुरंत डॉक्टर को दिखाएंUpdated: Mon, 06 Nov 2017 12:18 PM (IST)

नवजात शिशु की देखरेख किस तरह से की जानी चाहिए ताकि वे जीवनभर स्वस्थ जीवन रहें।

इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। किसी भी माता पिता के लिए उनके जीवन का सबसे खुशी का दिन वह होता जिस दिन उनका बच्चा इस दुनिया में आता है, लेकिन खुशी के साथ ही उसी दिन से उनकी जिम्मेदारी का सफर भी शुरू हो जाता है। नवजात शिशु की देखरेख में पेरेंट्स को छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखना पड़ता है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही शिशु के लिए घातक साबित हो सकती है।

7 नवंबर को वर्ल्ड इन्फेंट्स प्रोटेक्शन डे के रूप में मनाया जाता है। इस मौके पर नईदुनिया ने विशेषज्ञों से यह जानने की कोशिश की कि नवजात शिशु की देखरेख किस तरह से की जानी चाहिए ताकि वे जीवनभर स्वस्थ जीवन रहें।

शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ. शिल्पी मेहता के अनुसार पैदा होने से लेकर एक साल की आयु पूरी करने तक बच्चे को सबसे अधिक केयर की जरूरत होती है। जन्म के बाद के एक महीने तक तापमान का ध्यान रखना अति आवश्यक है। खासतौर पर ठंड के दिनों में ध्यान रखें कि बच्चे का कमरा गर्म रहे। प्रीमेच्योर बेबीज के केस में तो तापमान का ध्यान रखना और भी ज्यादा जरूरी हो जाता है।

क्योंकि इन्हें सामान्य बच्चों से ज्यादा केयर की आवश्यकता होती है। डॉ. मेहता का कहना है कि आज भी कई पुराने घरों में मान्यता है कि बच्चों को पानी, जन्मघुट्टी, शहद आदि दिया जाता है, लेकिन ये चीजें बच्चे के लिए हानिकारक हैं। इसलिए पहले छह महीने मां के दूध के अलावा बच्चों को कुछ भी न दें, पानी भी नहीं। हां उसके बाद बच्चों को हर तरह का खाना दें क्योंकि जो आदत आज बनेगी वो जीवनभर रहेगी।

पहले तीन महीने वेक्सीनेशन का रखें ध्यान

डॉ. निखिल ओझा के अनुसार शुरू के कुछ दिनों में पेरेंट्स को जिन बातों का ध्यान रखना है उसमें सबसे ज्यादा महत्वपूर्ण है कि देखें कि बच्चे की सांस की रफ्तार सामान्य है या नहीं, दूध बराबर पी रहा है या नहीं और उसकी चंचलता यानि हाथ पैर का मूवमेंट ठीक है या नहीं, बच्चे का रोना बहुत ज्यादा या बहुत कम तो नहीं है। अगर इनमें जरा भी संशय लगे तो तुरंत विशेषज्ञ से परामर्श लें। डॉ. ओझा के अनुसार बच्चे के जन्म के तुरंत बाद से लेकर पहले तीन महीने के सभी टीके लगवाना अति आवश्यक है क्योंकि इनमें जानलेवा बीमारियों के टीके शामिल होते हैं।

संक्रमण का खतरा अधिक

नवजात शिशुओं की रोग प्रतिरोधक क्षमता कम होने की वजह से ये बाहरी वातावरण के संक्रमण में जल्दी आ जाते हैं। इसलिए इन्हें संक्रमण से बचाने के लिए साफ सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए। जहां तक हो सके बच्चे और मां को अलग रहने दिया जाए जिससे बच्चे को लोगों द्वारा होने वाले इंफेक्शंस से बचाया जा सके। बच्चे के जन्म के कुछ दिन पहले ही माता और पिता दोनों बच्चे की सही केयर करने के बारे में सारी जानकारी डॉक्टरों से ले सकते हैं। इससे उन्हें जन्म के बाद आने वाली दिक्कतों का सामना नहीं करना पड़ेगा।

इन बातों का रखें ध्यान

- बच्चे को छूने के पहले हाथ अच्छे से धोएं।

- भीड़ वाली जगहों पर ले जाने से बचें।

- पहले छह महीने सिर्फ मां का दूध दें।

- समय पर वेक्सीनेशन करवाना चाहिए।

- बच्चों को ठंड से बचाएं। कमरे को वार्म रखें।

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