मासूमों के लिए जिंदगी कर दी समर्पित, इंदौर में कई 'चाचा नेहरू'Updated: Tue, 14 Nov 2017 03:59 AM (IST)

जब मासूम बच्चों के चेहरे पर मुस्कान गुम हो जाती है, तब उनकी जिंदगी को खुशियों से संवारने के लिए वे आते हैं।

इंदौर, नईदुनिया प्रतिनिधि। जब मासूम बच्चों के चेहरे पर मुस्कान गुम हो जाती है, तब उनकी जिंदगी को खुशियों से संवारने के लिए वे आते हैं। चारों ओर अशिक्षा का अंधियारा छाने लगता है तो उनमें शिक्षा का उजियारा करने के लिए वे पहुंच जाते हैं। आंख खुलने के पहले ही अपने छोड़कर भाग जाते हैं तो उन्हें दुलार देने लिए वे पहुंच जाते है।

कड़ी धूप में बदन जलता या सर्दी में ठिठुरता है तो उन पर प्यारभरा आंचल डालने के लिए वे पहुंचते हैं। उनकी जिंदगी का मकसद ही मासूमों के आंसू पोछना और उनकी छोटी-छोटी खुशियों में अपनी खुशी तलाशना है। भले ही देश-दुनिया में किसी को उनका नाम नहीं मालूम, लेकिन जरूरतमंद बच्चों के दिलों में जिंदगीभर के लिए बस चुके हैं। शहर में आज भी कई 'चाचा नेहरू' हैं जो मासूम बच्चों की एक मुस्कान की खातिर संघर्ष कर रहे हैं।

नाम- पंखुरी किरण प्रकाश

काम- गरीब बच्चों को निशुल्क शिक्षा

पंखुरी आठ वर्षों से खजराना क्षेत्र में गरीब और जरूरतमंद बच्चों को शिक्षा से जोड़ने का प्रयास कर रही हैं। खजराना क्षेत्र में नींव संस्था गठित की। समाज से मिलने वाली 20, 50 और 100 रुपए की मदद से बच्चों को पढ़ाने के संसाधन जुटाए।

स्कूल छोड़ चुके बच्चों को पढ़ने के लिए प्रोत्साहित कर सरकारी स्कूल से परीक्षा दिलवा रही हैं। अब तक खजराना क्षेत्र में भिक्षावृत्ति करने वाले, गरीब और जरूरतमंद हजारों बच्चे शिक्षा से जुड़कर अच्छा जीवनयापन कर रहे हैं। खजराना के बच्चों की 'दीदी' अब बच्चों के लिए निशुल्क सर्वसुविधायुक्त स्कूल शुरू करने की तैयारी कर रही हैं।

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