'हादसे के बाद लिखने से मोहताज हो गया था, अब जीत रहा हूं राइटिंग कॉम्पीटिशंस'Updated: Tue, 10 Oct 2017 12:48 PM (IST)

12 साल के स्टूडेंट कृष्णा काटे का महज पांच साल की उम्र में एक्सीडेंट हो गया था।

इंदौर, नईदुनिया रिपोर्टर। 12 साल के स्टूडेंट कृष्णा काटे का महज पांच साल की उम्र में एक्सीडेंट हो गया था। जिसमें न केवल उसे एक पांव खोना पड़ा बल्कि हाथ में लगी गहरी चोट के चलते वो लिखने से भी महरूम हो गया, लेकिन उसने हिम्मत नहीं हारी।

असली की जगह नकली पांव लगाया और भीषण दर्द के बावजूद धीरे-धीरे लिखने की कोशिश करता रहा। अब वो स्कूल में होने वाली राइटिंग कॉम्पीटिशंस में न केवल पार्टिसिपेट करता है बल्कि जीतता भी है। यही नहीं नकली पैर लगाकर उसने चलने के साथ-साथ दौड़ना भी सीखा। फिर से क्रिकेट खेलने के साथ-साथ वो इंदौर और मुंबई मैराथन में भी हिस्सा ले चुका है।

जोश-ओ-जुनून के जज्बे से लबरेज ऐसी ही कहानियां 'वर्ल्ड पोस्ट डे' के मौके पर संस्था 'क्रिएट स्टोरीज' द्वारा आयोजित कार्यक्रम में पोस्टकार्ड और पत्रों में लिखी गईं। इंदौर-उज्जैन हाईवे स्थित एक स्कूल में सोमवार दोपहर हुए इस विशेष कार्यक्रम का उद्देश्य स्मार्टफोंस, इंटरनेट और टेक्नोलॉजी के पीछे भाग रही युवा पीढ़ी को लेखन के महत्व से रूबरू कराना था।

कार्यक्रम में बच्चों द्वारा उन सफाईकर्मियों को धन्यवाद स्वरूप भी कुछ लेटर लिखे गए जिन्होंने शहर को स्वच्छता में नंबर वन बनाने में अहम योगदान दिया है और वो अब भी हमारे घरों, स्कूलों, दफ्तरों, दुकानों से नियमित रूप से कचरा उठा रहे हैं। ये लेटर बच्चे ही अपने क्षेत्र के सफाईकर्मियों को देकर उनके प्रति आभार व्यक्त करेंगे।

न कचरा फैलाता हूं, न फैलाने देता हूं

9 साल की लक्ष्य खत्री ने अपने लेटर में लिखा कि 'सफाई वाले अंकल आपके कहे अनुसार मैं हर रोज दो डस्ट बिन में सूखा और गीला कचरा अलग-अलग डालकर सफाई के आंदोलन में अपना छोटा सा योगदान दे रही हूं।'

एयरफोर्स ऑफिसर रह चुकी सुष्मिता सहाय ने स्वच्छता अभियान में जुड़े लोगों के लिए लिखा कि आपकी मेहनत का फल अब पूरे इंदौर को साफ-साफ नजर आने लगा है। बिजनेसमैन अर्जुन चौरसिया ने खत में लिखा कि सफाईकर्मियों की प्रेरणा से अब मैं न तो खुद कचरा फैलाता हूं और न ही अपने सामने किसी को ऐसा करने देता हूं।

चित्रों में उकेरा लेखन का महत्व

खतों के साथ बच्चों ने रंग-बिरंगे चित्रों के जरिए भी लेखन के महत्व को उकेरा। जेराज जैन ने एक चित्र बनाया जिसमें लैपटॉप चलाने वाला शख्स टेंशन और डिप्रेशन से घिरा नजर आ रहा है वहीं खुद लिखने वाला शख्स प्रसन्नाचित्त है क्योंकि लेखन करने से दिमाग की एक्सरसाइज होती रहती है, उसके एक्यूप्रेशर प्वाइंट्स दबते हैं और व्यक्ति खुद को फ्रेश, रिलेक्स और तरोताजा महसूस करता है। बच्चों, युवाओं को सही राह दिखाने के मकसद से हुए कार्यक्रम का संचालन दीपक शर्मा ने किया।

संबंधित खबरें

जरूर पढ़ें

FOLLOW US

Copyright © Naidunia.